Chai and Shayari
. हमने नहीं बदला है रिश्तों को, इन रिश्तों ने हमको बदला है, हम रातों को रात समझते थे…
. हमने नहीं बदला है रिश्तों को, इन रिश्तों ने हमको बदला है, हम रातों को रात समझते थे, रातों के राज़ ने सब कुछ बदला है। बिखरे थे मेरे दिल के टुकड़े, उनके तो ब…
Read more. अधूरी थी नज़्म-ए-ज़िंदगी, तेरी दीद से पूरी हो गई। अक्षर बिखेरे तेरे नाम के, रुबाई पूरी हो गई। तारीफ की तेरे हुस्न की, मेरी ग़ज़ल पूरी हो गई। नूरम' हमारी …
Read more. जुंबिश-ए-फ़रेब है मुहोब्बत उनकी, जिनकी फ़रेब-ए-जुंबिश है ज़िंदगी, 'नूरम' फ़रेब-ए-ज़िक्र है दास्ताँ उनकी, जिनकी ज़िक्र-ए-फ़रेब है बंदगी।
Read moreवो मोहब्बत की वजह पूछते हैं,जिन्हें हम बेवजह चाहते रहे। वह सिसकने का सबब पूछते हैं,जिन्हें हम अपनी सांसें मानते रहे। वस्ल का दिन था, जवान थीं उमंगें, दस्तूर-ए-…
Read more. बहते आंसुओं को क्या पता, क्या कह रहे हैं वो, सिसकियों को क्या पता, क्या सुना रही हैं वो। हाल तेरे दिल का मुझ तक, यूँ पहुँचा है 'नूरम', जैसे परदेस से …
Read more. जिन्हें निभाने में सब कुछ मिट गया, मैं आज भी मानता हूँ उन रिश्तों को। पर मेरी कब्र वीरान पड़ी रहेगी, हाँ, मैं जानता हूँ अपने रिश्तों को। जिन्हें रौशन किया अपन…
Read more. सपना होता तो भुला देते, ख़्वाहिश होती तो मिटा देते। आप धड़कता हुआ दिल हैं हमारा, 'नूरम' आप कहें तो साथ निभा लेते।
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. हमने नहीं बदला है रिश्तों को, इन रिश्तों ने हमको बदला है, हम रातों को रात समझते थे…
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