Chai and Shayari
. उसने जोड़ा है खुशबू को शीशी में, जिसने फूलों को टहनी से जुदा दिया। वो अब चला रहा है …
. उसने जोड़ा है खुशबू को शीशी में, जिसने फूलों को टहनी से जुदा दिया। वो अब चला रहा है खुशबू की दुकान, 'नूरम' जिसने गुलाबों के ज़ख़्मों को हरा कर दिया।
Read more. वो देखता है मुझको मगर बेहया नहीं, मैं देखने लगूं तो मुझे देखता नहीं। दबी दबी सी है हया आंखों में उसकी 'नूरम' मैं मुंतज़िर हूँ, वो छेड़ता नहीं।
Read more. Poem: For men india Parivar हम होंगे कामयाब, दिलाएंगे बेटों को इंसाफ, खोलेंगे कानून की आंख, दिखलाएंगे हैवानियत साफ। मिटाएंगे पक्षपात का साया, लाएंगे एक नय…
Read more. हम तेरे शहर में आए, तो खफा मत होना, तेरी चौखट पे न आएंगे, चले जाएंगे। हम बिखरे हैं जरा सा, संभल जाएंगे, जब याद वो गुजरे जमाने आएंगे। तुझे छू के आने वाली हवा,…
Read more. लफ़्ज़ों में नूर और काम भी है रोशनी का, उम्मीद है चिराग से घर चलेगा मुफ़्लिस का। वह राख चाहिए जो रोशन रूह को करे, 'नूरम' तभी तो घर बचेगा मिस्कीन का।
Read more. दवा और दुआ से आगे का यह दर्द है, इश्क़ कमबख़्त, बहुत आगे का मर्ज़ है। नाकाम हुईं सब कोशिशें, नाकाम सब अमल हैं, मोहब्बत के सैलाब में तिनके को भी लर्ज़ है। यह…
Read moreनमस्ते दोस्तों, शब्दों, धुनों और कविताओं के हमारे इस सफर को एक नया रूप देने का समय आ गया है। उपनाम nuRam के तहत लिखी गई रचनाओं और गहरे विचारों से प्रेरित होकर…
Read more. उसने जोड़ा है खुशबू को शीशी में, जिसने फूलों को टहनी से जुदा दिया। वो अब चला रहा है …
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