Haiku Today ' एक विचार '
. सुलगते हैं दहकते अंगारे बुझे क्या जलें ।
. सुलगते हैं दहकते अंगारे बुझे क्या जलें ।
Read more. बिखरे अंश अर्थहीन हो जाते देते चुभन ।
Read more. आतंक चीर धरा को ढक गया रोको हे ' कृष्ण ' ।
Read more. ठिकरी करे कुम्हार को घायल आज की रीत ।
Read more. प्रेम सुधा को तलाश रहे सब बिन प्यास के ।
Read more. सिंदूरी उषा घूँघट में छिपाए शिशु प्रातः है ।
Read more. बुना स्वयं ही अपना है कुकून किसकी भूल ।
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