Chai and Shayari - करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं!
. दूर छलनी से देखती है वो चेहरा मेरा, हम पास होते हैं तो नज़र मिलते नहीं। इस रिज़्क़ …
. दूर छलनी से देखती है वो चेहरा मेरा, हम पास होते हैं तो नज़र मिलते नहीं। इस रिज़्क़ को माइल कहिएगा? 'नूरम', या वो राज़ जो लाज से बताते नहीं।
Read more. मेरे हाथों में तेरी तस्वीर है, तेरे हाथों में मेरी तक़दीर है। 'नूरम' क्या कसूर है हाथों का, जो मिलती नहीं लकीर है।
Read more. उन्सियत हो गई उदासी से, जब मोहब्बत से नफ़रत हो गई। पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम था जिन्हें, वो भी रिंद-ए-नियाज़ी हो गए। ढूंढते थे महफ़िलों में सुकून-ओ-ख़रोश, …
Read more. यह जो बह रहा है जज़्बात है मेरा, वह जो भटक रहा है दिल है मेरा। जो बैठा है किनारे पे, सुलग रहा, 'नूरम' क्या कहें वो एहसास है तेरा।
Read more. हुस्न-ए-बयाँ कुछ यूँ किया मेरे दीवाने ने, हम ढूँढ़ते रहे खुद को उनके अफ़साने में, हासिल-ए-इंतिख़ाब-ए-इश्क़ क्या समझा मुझे, 'नूरम' ज़माने लग गए हमे…
Read more. ढूंढती हैं निगाहें जिसे, क्या दिल भी ढूंढता है उसे?, 'नूरम', आपकी आवारगी कहीं आवारापन तो नहीं?
Read more. जुगलबंदी नज़्म: हमसफ़र मैं फ़िज़ा की तरह तेरे पास रहूँगा, मैं हवा की तरह तेरे साथ रहूँगा। मैं फ़िज़ा की तरह तेरे पास रहूँगा, मैं हवा की तरह तेरे साथ रहूँगा। …
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. दूर छलनी से देखती है वो चेहरा मेरा, हम पास होते हैं तो नज़र मिलते नहीं। इस रिज़्क़ …
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