Chai and Shayari
वो मोहब्बत की वजह पूछते हैं, जिन्हें हम बेवजह चाहते रहे। वह सिसकने का सबब पूछते हैं, ज…
वो मोहब्बत की वजह पूछते हैं, जिन्हें हम बेवजह चाहते रहे। वह सिसकने का सबब पूछते हैं, जिन्हें हम अपनी सांसें मानते रहे। वस्ल का दिन था, जवान थीं उमंगें, दस्तूर-…
Read more. बहते आंसुओं को क्या पता, क्या कह रहे हैं वो, सिसकियों को क्या पता, क्या सुना रही हैं वो। हाल तेरे दिल का मुझ तक, यूँ है पहुँचा 'नूरम', जैसे परदेस से …
Read more. जिन्हें निभाने में सब कुछ मिट गया, मैं आज भी मानता हूँ उन रिश्तों को। पर मेरी कब्र वीरान पड़ी रहेगी, हाँ, मैं जानता हूँ अपने रिश्तों को। जिन्हें रौशन किया अपन…
Read more. सपना होता तो भुला देते, ख़्वाहिश होती तो मिटा देते। आप धड़कता हुआ दिल हैं हमारा, 'नूरम' आप कहें तो साथ निभा लेते।
Read more. आदतन तो शायर था मैं, मिज़ाजन शायर बना दिया, आपकी एक झलक ने, 'नूरम' यक़ीनन शायर बना दिया।
Read more. यह यक़ीन कि आपकी मोहब्बत, हमें गिरने नहीं देगी, 'नूरम' इसलिए हम उड़ते हैं ताअस्सुर में, आपके प्यार के।
Read more. जाने वाले एक नज़र देख तो ले, किस कदर तेरे इंतज़ार में बैठे हैं, हम तेरे हुस्न में मजबूर नहीं, 'नूरम' तू चाहें तो हम संभल भी सकते हैं।
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वो मोहब्बत की वजह पूछते हैं, जिन्हें हम बेवजह चाहते रहे। वह सिसकने का सबब पूछते हैं, ज…
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