Haiku Today ' एक विचार '
. सिंदूरी उषा घूँघट में छिपाए शिशु प्रातः है ।
. सिंदूरी उषा घूँघट में छिपाए शिशु प्रातः है ।
Read more. बुना स्वयं ही अपना है कुकून किसकी भूल ।
Read more. वृक्ष सहता पतझड़ में शीत मौसम ने दी ।
Read more. नीड़ बनता जुड़े तिनको से ही बिखरे चुभे ।
Read more. रिक्त गागर प्यास तो न बुझाये बजे अवश्य।
Read more. बाढ़ तो बाढ़ ढह जाता सर्वस्व बूँद ही भली ।
Read more. सहरा हो तो सूर्य भी देता छाले चाँदनी छल ।
Read more
Social Plugin