Chai and Shayari
. यह जो बह रहा है जज़्बात है मेरा, वह जो भटक रहा है दिल है मेरा। जो बैठा है किनारे पे स…
. यह जो बह रहा है जज़्बात है मेरा, वह जो भटक रहा है दिल है मेरा। जो बैठा है किनारे पे सुलग रहा, 'नूरम' क्या कहें वो एहसास है तेरा।
Read more. हुस्न-ए-बयाँ कुछ यूँ किया मेरे दीवाने ने, हम ढूँढ़ते रहे खुद को उन अफ़साने में, हासिल-ए-इंतिख़ाब इश्क़ का समझा मुझे, 'नूरम' ज़माने लग गए ज़ुल्फ़ स…
Read more. ढूंढती हैं निगाहें जिसे, क्या दिल भी ढूंढता है उसे?, 'नूरम', आपकी आवारगी कहीं आवारापन तो नहीं?
Read more. जुगलबंदी नज़्म: हमसफ़र मैं फ़िज़ा की तरह तेरे पास रहूँगा, मैं हवा की तरह तेरे साथ रहूँगा। मैं फ़िज़ा की तरह तेरे पास रहूँगा, मैं हवा की तरह तेरे साथ रहूँगा। …
Read more. अरमानों पे पत्थर रख लिया, पत्थर दिल से दिल लगाके, हम बार-बार पुकारते रहे, 'नूरम' वो हर बार हमें तराशते रहे।
Read more. @nuramshayari हमने नहीं बदला है रिश्तों को, इन रिश्तों ने हमको बदला है, हम रातों को रात समझते थे, रातों के राज़ ने सब कुछ बदला है। बिखरे थे मेरे दिल के ट…
Read more. अधूरी थी नज़्म-ए-ज़िंदगी, तेरी दीद से पूरी हो गई। अक्षर बिखेरे तेरे नाम के, रुबाई पूरी हो गई। तारीफ की तेरे हुस्न की, मेरी ग़ज़ल पूरी हो गई। नूरम' हमा…
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. यह जो बह रहा है जज़्बात है मेरा, वह जो भटक रहा है दिल है मेरा। जो बैठा है किनारे पे स…
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