Chai and Shayari
. चलो अच्छा हुआ कि तुम्हें किसी से तो मोहब्बत हुई, एक अरसे से सँभाली थी हमने तस्वीर, र…
. चलो अच्छा हुआ कि तुम्हें किसी से तो मोहब्बत हुई, एक अरसे से सँभाली थी हमने तस्वीर, रुख़सत हुई। तेरी तस्वीर ने, तेरी सोहबत से ज़यादा सताया है हमें, 'नूरम…
Read more. नज़्म : फ़रेब-ए-शब जलते हुए दिए से पूछा, बहती हवाओं ने, यह किसकी आरज़ू है, इन जलती बांहों में। बुझ जाएगी हसरत तेरी, इन सर्द रातों में, बिखर जाएगी तू किरणों स…
Read more. . तुम्हारे संग में क्या डूबे, तुम्हारा रंग अपना लिया, तुम्हें पसंद थे जो रंग, वो ढंग अपना लिया। तुम इश्क़ में दीवाना कहते थे हमें 'नूरम', लो तुम्हारे…
Read more. दूर छलनी से देखती है वो चेहरा मेरा, हम पास होते हैं तो नज़र मिलते नहीं। इस रिज़्क़ को माइल कहिएगा? 'नूरम', या वो राज़ जो लाज से बताते नहीं।
Read more. मेरे हाथों में तेरी तस्वीर है, तेरे हाथों में मेरी तक़दीर है। 'नूरम' क्या कसूर है हाथों का, जो मिलती नहीं लकीर है।
Read more. उन्सियत हो गई उदासी से, जब मोहब्बत से नफ़रत हो गई। पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम था जिन्हें, वो भी रिंद-ए-नियाज़ी हो गए। ढूंढते थे महफ़िलों में सुकून-ओ-ख़रोश, …
Read more. यह जो बह रहा है जज़्बात है मेरा, वह जो भटक रहा है दिल है मेरा। जो बैठा है किनारे पे, सुलग रहा, 'नूरम' क्या कहें वो एहसास है तेरा।
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. चलो अच्छा हुआ कि तुम्हें किसी से तो मोहब्बत हुई, एक अरसे से सँभाली थी हमने तस्वीर, र…
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