Haiku Today ' एक विचार '
. उझले आज निपुण हाथों से ही सुलझे धागे ।
. उझले आज निपुण हाथों से ही सुलझे धागे ।
Read more. प्यासी धरा तो नभ ताकती रही मौसम बीता ।
Read more. सूखे खेतों से मिट्टी भी उड़ गई हवा के संग ।
Read more. रस्सी की गाँठ सहता बूढ़ा वृक्ष बना है झूला ।
Read more. कलियाँ खिली बगिया इतराई खिले थे टेसु ।
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