.
Click to join me on rumble
💖 मेरे दिल का मौसम 💘
1
न चलो यूँ बलखा के, हुस्न वालो कि 'नूरम'
नाचीज़ भी रखते हैं, दिल अरमानों भरा।
2
इश्क़ कौन चमन है, हम से पूछो 'नूरम'
दो काँटें क्या चुभे,कहते हो दर्द हो उठा।
3
दीवाना हूँ आपके हुस्न का
'भौरा' मत समझ मुझे 'नूरम'
तलबगार हूँ आपके प्यार का
आवारा मत समझ मुझे।
4
मत दे इतने ज़ख्म, ए-संगदिल 'नूरम'
ज़ख्म भी परेशां है, कहाँ से उठे ।
5
जब हम खफा थे तब उन्हें, खबर भी न थी 'नूरम'
अब हमने हल पूछा है, तो कहते हैं तुम बेवफा हो ।
6
खुदा बचाये इन हसीनों की, आदाओं से 'नूरम'
पागल बनाते हैं और लब पे अलफ़ाज़ भी नहीं।
7
हम भी ग़ालिब होते, इस दौर के 'नूरम'
पर आपका दिया दर्द, शायद कुछ कम था।
8
कैसे भुला दें इन गमों को 'नूरम'
यही तो यादें है आपकी जिनसे
दिल को सजा रखा है हमने।
9
आपकी मुस्कुराहट को, इकरार समझें
'नूरम' या फिर, हँसना मेरी दीवानगी पर।
10
चलाये जा मोहब्बत, यूँ ही संगदिल
'नूरम' मेरे आँसू फिर भी ग़ज़ल कहेंगे।
11
होती नहीं अब आँख भी नम 'नूरम'
गम को भी मेरे किसकी नज़र लगी।
12
वोह जो दाद दे रहें हैं, मेरी शायरी पर 'नूरम'
कोई उनसे कहें हम, हाल-ए-दिल कह रहे हैं।
13
होती नहीं पतझड़ में शाख हरी,
पर हम आप पे ए'तिबार कर बैठे;
हम तो आप के दीवाने हैं 'नूरम',
बिन मौसम का प्यार कर बैठे।
14
मुझे जलाने से पहले, मेरा दिल निकाल लेना
'नूरम' बड़े नाज़ुक है वों, जो दिल में रहते हैं।
15
तुम रूठ जाओ, तुम्हें हक़ है,
पर हम क्या करें 'नूरम'
हमने तो मोहब्बत की है।
16
सम्भल के रहिये जो, दिल तोडा है किसी का
'नूरम' टूटा शीशा भी, खंजर हुआ करता है।
17
कभी कभी दिखा करो झरोंखों से भी 'नूरम'
कि कभी ईद वक़्त से पहले भी आना चाहिए।
18
यूँ तो रोज़ों में, बंदिशें है कईं
पर 'नूरम' आप को देखना
कोई गुनाह तो नहीं।
19
कभी फुर्सत में मिलो किताबें-ए-गम सुनाएँगे
'नूरम' चार मुलाकातों में कितने हर्फ़ बतला पाएंगे ।
20
हमने चाहा है तुम्हें, चाँद सितारों से आगे
'नूरम' क्या मालूम था, तुम भी दूर हो जाओगे ।
21
उनकी हर ख़ता माफ़ की, हमने, समझ कर आख़िरी
'नूरम' आज हमें अफ़सोस है,कि अब है साँस आख़िरी।
22
ना आप मिलते, न हम लर्ज़ाते 'नूरम'
न खुश फेहमी होती, न गलत फेहमी होती।
23
जाँ भी देदें आपके एक इशारे पर 'नूरम'
बशर्ते कफ़न में आँचल आपका नसीब हो।
24
शुक्र है कि मिलते हैं अब, हमसे नज़रें झुका के वो
'नूरम' नशे में झूमते देखा है, नज़रें मिलाने वालों को।
25
कैसे कैसे बनायें इंसाँ, तूने मुझे सताने के लिए
'नूरम' सीना बचता हूँ तो, पीठ कराह उठतीं है।
26
आपकी मोहब्ब्त में, मुकाम मिला कुछ ऐसा
'नूरम' साहिल पे तो हैं, पर मछली की तरह।
27
हम तो काबिल न थे, आपकी मोहब्बत के 'नूरम'
उनका क्या हुआ? जिनसे आपको मोहब्बत थी।
28
न मोत की आस है, न ज़िंदिगी की प्यास
'नूरम' यह कैसा साहिल है, जो तूफ़ाँ के पास है।
29
वो इतना बरसे कहीं, की दिल भर गए 'नूरम'
मेरे सहरा-ए-दिल पे, एक बूँद भी नहीं।
30
ज़रा देखो इन ग़मों को, परेशां करते है धड़कनों को;
नादाँ इतना भी नहीं जानते, 'नूरम' दिल में तुम रहते हो।
31
मुझे तड़पा के चैन आता है जिन्हें,
'नूरम' खुदा हुस्न लेकर दिल दे उन्हें।
32
मेरी चाहत से तू है, तेरे हुस्न से मैं नहीं,
मैं लिखूँ तो तू ग़ज़ल है, 'नूरम' वरना तू हर्फ़ नहीं।
33
गैरों के लिए है तेरी, ज़ुल्फ़ों की कली घटा,
'नूरम' न जाने यह बिजली, मेरे लिए क्यों छुपा रखी है।
34
कैसे जी पाएँगे हम, आप से जुदा हो कर,
'नूरम' आप जो धड़कते हैं, सीने में दिल बन कर।
35
वो जो पास नहीं हैं,पर दिल के हैं करीब
तबस्सुम जिनके लब पर हमारी ग़ज़ल सुनकर
'नूरम' उनसे कहिये अब फासले हैं पलभर
36
हम उनकी खुशी का, सामान हो गए 'नूरम'
पर जब हमने पुकारा, तो घर मकान हो गए।
37
न जाने इश्क़ में क्या राज होता है 'नूरम'
मोहब्बत के सर पे हमेशा इलज़ाम होता है।
हिचकियाँ और सिसकियाँ साज़ होता है,
आप जगा के इंतज़ार आशिक़ खाक होता है।
38
कुछ इस तरह मिला, गम कतरा कतरा 'नूरम'
कि कब दिल डूबा कब हम डूबे, पता ही नहीं चला।
39
खुदा बचाये इन हसीं तितलियों से,
जिनपर कलियाँ ऐतबार करती हैं 'नूरम'
रंग बहार, शोखियाँ मौज-ए-तबस्सुम,
ये लूट आ'माल-ए-चमन फरार होती हैं।
40
क़लम-बंद-करने की ख़ातिर, आपने हमें मिटा डाला 'नूरम'
चलिए इसी बहाने आपने, हमें लफ़्ज़ों में बदल डाला।
41
तुम पास न थे, तो गम शुदा थे
'नूरम' अब शादीशुदा हैं
तो क्या कम है।
42
आप मेरा जुनू हैं पूरे कॉलेज को खबर है 'नूरम'
बस हमें मालूम नहीं और आप बेखबर हैं।
43
द्वार खड़ा मादक यौवन 'नूरम'
फिर भी तुम में कितना बचपन।
44
मुक़द्दर ने छीन ली मोहब्बत मुझसे मेरी, 'नूरम',
पर सज़ा हमें आपसे मिली, दिल लगाने की।
45
आजाओ बैठो पास हमारे,
हम भी ग़म ग़लत करें
कब तक पिलाओगे गैरों को
'नूरम' हम पे भी नज़र-ए-करम करें।
46
वो आये महफ़िल में इस तरह रौशन-रौशन;
जल उठा दीवानों का दिल रौशन-रौशन।
शमा-ए-महफ़िल क्या रखते उनके सामने 'नूरम'
लग रहा था जिनका चेहरा सबसे रौशन-रौशन।
47
माना आपकी मोहब्बत के काबिल नहीं हैं हम,
'नूरम' पर देखें हमें, हम मर रहें हैं ज़रा ज़रा सा।
48
हमारी ज़िंदगी सफर नहीं,
एक सड़क बन गई है 'नूरम'।
आप आते हैं ब्रेक लगते हैं,
अरमान जागते हैं, चले जाते हैं।
49
जो हो दिलों में रंजिश तो ईद क्या करें,
'नूरम' हो इश्क़ नाराज़ तो दीद क्या करें।
50
कहाँ तक बचते हसीनों से,
आखिर आँख लड़ ही गई।
इज़हार किया मोहब्बत हुई,
'नूरम' ज़माने की नज़र लग ही गई।
51
हर शख्स मुनाफ़िक़ निकला मेरे दायरे में;
'नूरम' हमने दायरे बड़ा के भी देख लिया।
और सुकून तब मिला, रूह को हमारी,
जब उनकी यादों को भी निकल के देख लिया।
52
वह शख्स अब मिलता नहीं, कहता था रहेंगे आँख बनकर
पर न जाने क्यों अब हम, संभल कर चलते भी नहीं।
53
खुदा न दे हुस्न उन्हें, जो आशिकों की कदर न करें
'नूरम' जगाकर आरज़ू सीने में ओरों से बात करें।
54
आपकी मोहब्बत में जफ़ा में का ज़िक्र लगता है
'नूरम' अब हमें बाज़ार भी घर सा लगता है।
55
मत कहो बेवफा उन्हें 'नूरम'
बस इक मुद्दत से रूठे हैं वो।
56
आपके इंतज़र में पलकों को बिछा दूँ,
आप जो हाँ कहें तो सीने से लगा लूँ।
जन्नत जाने से पहले आपकी रजा लूँ;
'नूरम' जो न कहें तो खुद तो मिटा लूँ।
57
आपकी सादगी में भी गुरूर है 'नूरम',
कह दो यह हमारी मोहब्बत का गुमान है।
58
जा रख तेरी खुशबू, तेरे पास गुलाब 'नूरम',
मैं अपने काँटों को महकना सिखा रहा हूँ।
59
मकबरे दिल के धड़कने पर,
अरमानों का कफ़न चीर कर;
जब बेवफाई मुस्कुराती है 'नूरम'
हमें सिर्फ आपकी याद आती है।
60
दिल को शीशे में उतार कर,
बेरुखी का ढक्कन लगा लिया;
'नूरम' आपने न अपना बनाया,
न किसी ओर का होने दिया।
61
न आये कल शाम जो, चलो माफ़ किया 'नूरम';
जनाज़े पे ज़रूर आना, वरना दिल रुकेगा नहीं।
62
कभी उनको कभी वक़्त को, हमारी कदर न हुई 'नूरम';
हम जिये कुछ इस तरह, कि ज़माने को खबर न हुई।
63
आपसे दिल लगाके, हमें क्या मिला? 'नूरम',
न हम जी सके पूरा, और न पूरा मर सके।
64
न मांगी थी मोहब्बत हमने, न माँगा था आपसे प्यार 'नूरम'
बस इतनी थी हसरत हमारी, कि देखें आप को एक बार।
65
संभल के इन हसीनों से, यह खूबसूरत बलाऐं हैं;
प्यार से डसती हैं 'नूरम', इनकी अलग निगाहें हैं।
66
हमने नया नाम दिया- दीवाना,
हमने नयी पहचान दी- परवाना।
गम चबाने का सिखाया सलीका,
जाम पीने का दिया सकीना 'नूरम'।
कहा कैसे आपने- खुदगर्ज़ हसीना,
अस्तग़फ़िरुल्लाह वो नाज़नीना।
67
सुबह से शाम तक इंतज़ार करूँ,
शाम से सुबह तक याद करूँ;
रस्म-ए-मोहब्बत है अभी बाकी,
'नूरम' कैसे आपका दीदार करूँ।
68
आपसे जो रिश्ता है 'नूरम',
इसका कोई बाणी नहीं
इबादत कहें या अक़ीदत।
69
आपसे जो दर्द मिला, लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता, आँखों से होता है,
'नूरम' जब कोई मेरे गीतों के मायने पूछता है, तो क्या बताते हो?
70
मेरे मेहबूब तेरा तड़पना नहीं बनता,
बार बार परवाने का मरना नहीं बनता;
कुछ तो हया होगी कायनात में 'नूरम',
मोहब्बत का नाकाम होना नहीं बनता।
71
हमें इश्क़ सिखा के खुद भूल गए 'नूरम',
ऐसे तो मुर्शिद के नुमायाँ नहीं होते।
72
इरादे तो नेक है, पर ख्याल अनेक हैं,
आप से मोहब्बत का सोचा नहीं अभी;
'नूरम' किस को दें दिल, दिल तो एक है।
73
घर-बाहर, सुबह से शाम तक, आप का ही तस्सवुर है हमें;
यकीन न हो 'नूरम' कॉलेज की, हाज़िरी बही निकल के देख लें।
74
कुछ इस तरह कटती है शामें अब 'नूरम'
लगता है बे-सबब सुबह हो जाती है।
75
सुना है आईना भी आपके दीदार को तरसता है,
'नूरम' हम बे-वजह, हसरत-ए-दीदार को बैठे हैं।
76
दस्तान-ए- इश्क़ एक ऐसा फ़साना है,
जिसे बताना भी है और छुपाना भी 'नूरम'
ये वह फन है जिसके, मेज़बान सब है,
क़दरदाऩ कईं और मेहरबान कोई नहीं।
77
सुना है मोहब्बत आग का दरिया है,
हम तो जल गए, हिज्र की आग में।
'नूरम' और आप तैर के निकल गए !
78
कहते हो मोहब्बत गुनाह नहीं,
'नूरम' तो आप करते क्यों नहीं?
79
लैला ने कैस से सिर्फ एक बार कहा,
और वो मजनू हो गया 'नूरम',
और यहाँ उम्र बीत गई, आप को समझने में।
80
इश्क़ हद से गुज़र जाये तो नसीब बनते हैं,
गम हद से गुज़र जाये तो 'नूरम' बनते है।
81
किसी गीत से लगते हैं आप हमें,
'नूरम' बस हम गुनगुना नहीं सकते।
82
आप किस्मत में ना सही ख्वाबों में तो हैं,
हमने तो आपका दिल चुरा लिया है 'नूरम'
आप भी तसव्वुर में हमें सज़ा दे सकते हैं।
83
कुछ तो हुआ है, कुछ ठीक नहीं लगता,
घर पे अब हमारा दिल नहीं लगता।
कॉलेज से आने का, मन नहीं करता,
'नूरम' हमें इश्क़ हुआ, आपको नहीं लगता।
84
काली तेरी गुत, हुलारे मारदा कला परांदा,
काला सूट ते आँखें उत्ते काला तिल नीं।
चान्न वर्गा मुँह तेरा 'नूरम' उतों काली रात नीं।
85
सरेआम कर दिया मोहब्बत को, कोई इल्ज़ाम तो दिया होता।
लिहाज़ किया होता ज़माने का, रस्मन आदाब ही कहा होता।
86
हम खुद को बहलाते हैं, खुद के सुकून के लिए,
हर बार वापस आते हैं, आपने प्यार के लिए।
मोहब्बत असर या अम्ल नहीं है, 'नूरम', कैसे बताये,
हर सुबह आज़ाद करते हैं, आपको अपने जमाल से।
87
सफर-ए-शायरी ऐसा चला, साज़ भी मिला, सोज़ भी;
यार भी मिला, प्यार भी 'नूरम' बेकरार भी हुए, बेरोज़गार भी।
88
साँभ के रखा है, प्यार, आप के लिए, जब मिलोगे दे देंगे,
'नूरम' वरना अगले, जन्म के लिए रख लेंगे।
89
आपको याद करने वाले तो बहुत हैं,
हम तो यादों में रोने वालों में से हैं।
मोहब्ब्त का सबूत मांगते हो 'नूरम',
हम तो आपके चाहने वालों में से हैं।
90
कुछ दिनों की मोहब्बत, कुछ दिनों में भूलती नहीं,
ज़माने लगते हैं 'नूरम', फिर अक्स ढूँढ़ने में।
91
निसबत-ए-खास है कोई मुजस्समें से,
वरना कौन यूँ रोता है इस ज़माने में?
कब्र में भी सुकून से रहने न दिया 'नूरम'
रो-रो के क्या हाल कर लिया दीवाने ने।
92
दिललगी नहीं मोहबब्त सच्ची है, आपको महबूब जान लिया
'नूरम' हम भी इश्क़ कर के देखेंगे, अब हमने भी ठान लिया।
93
आपका दीदार साफ़ था, हमने करवट बदल के देख लिया,
'नूरम' आप चाँद से लगे ख्वाब में, हमने चुपके से चूम लिया।
94
आप रूह को पसन्द हो, आपसे मोहब्बत का पूछ लिया,
'नूरम' कैसे यकीन दिलाएँ, आपने यूँही हमें ठुकरा दिया।
95
आपका झिड़कना माफ़ है, अब हमने खुद को समझा लिया,
'नूरम' ज़माना हँसता रहा है दीवानों पर, बुरा मनाना छोड़ दिया।
96
बे-फ़िक्री से निकला करो अब आप, हमारी परवाह न किया करो,
'नूरम' हमने मस्नूई* अदब के उस शहर में, अब जाना छोड़ दिया।
*artificial, fabricated, counterfeit, false
97
आज कल, यहाँ नहीं, अभी नहीं, से आगे का सफर करना है।
मोहब्बत की हद क्या है, कैसी है, 'नूरम' वोह विज्दान* करना है ।
*ecstatic condition, euphoria
98
मुफ़लिसी के दिनों में भी, मायूसी के दिए न जलेंगे।
'नूरम' यह जशन-ए-दिवाली, आपके खत जलाकर मायेंगे।
99
मोहब्बत की कसम, पूरी कर न सके
किनारे करके आपको, हम जी न सके।
कुछ तो ज़रूर होगी मजबूरी, आपकी भी
'नूरम' आप भी प्यार हमसे कर न सके।
100
मोहब्बत का भी मिज़ाज़, खास होता है 'नूरम'
हम मरते है जिन पे, उनको हमेशा ऐतराज़ होता है।
101
किसी शिहाब* सा गिरा एक ही सवाल हमारा,
जितना याद करतें हैं आप भी करते हो क्या?
सिफ़ारती** जवाब आपका खुद से पूछ कर देखलो;
आप के आपे में हैं 'नूरम' जानते हो जवाब हमारा।
*falling star, a meteor, comet
**diplomatic
102
हसीनों की ज़ात, आराइश* खाली,वादे खाली;
आशिकों की ज़ात, बोतलें खाली, जनाज़े खाली;
मोहब्बत एहसास, दिल खाली, ज़ेहन खाली;
गुमशुदा एहसास, रस्में खाली, बातें खाली;
बेदर्द एहसास, जेब खाली, 'नूरम' खाली।
*cosmetic
103
बहुत प्यारी है तेरी आँखें, जिनमें मेरा इंतज़ार है, 'नूरम'
सुबह तलक जागीं है यह, इनमें रोशन मेरा प्यार है।
104
नींद में ख्वाब, ख्वाब में तुम, 'नूरम'
क्या कभी हकीकत मैं मिलेंगे हम?
105
बहुत कुछ सीखा है हमने तेरी चाहत में, 'नूरम'
कि छलकये जाते हैं जाम अक्सर मोहब्बत में।
106
एक चाँद है जो रहता है, मेरे दिल में 'नूरम'
पर कभी-कभी दिख जाता है मुझे दिन में।
107
सर्द रात, गर्म सासें, प्यार का बुखार तो होना ही था,
तुम मानो या ना मानो 'नूरम', तुम्हें हमारा होना ही था।
108
आपके छूने से सिहर जाते हैं हम, दूर जाने से ठिठुर जाते हैं,
'नूरम' हमें, हमारी यह मोहब्बत, मसला दिल का नहीं लगता।
109
यह इश्क़ भी क्या हाल बना देता है,
'नूरम' किसी के हाथों में हाथ,
किसी के हाथों में कटोरा थमा देता है।
110
मेरे बाद किसको सताओगे, मेरे बाद किसको रुलाओगे;
'नूरम' जब हम न होंगे पास में, तो किसको मनाओगे।
111
चलो वो इश्क़ करें, जिसमें दर्द न हो,
'नूरम' बा-असूल हम हो, बेफिक्र तुम हो।
जिसमें हर सुबह तेरे लबों पे मेरा ज़िक्र हो,
जिसमें हर शाम मेरे लबों पे तेरा नाम हो।
112
मेरा प्यार आपको पिंजरा लगता है,अब कैसे समझाए आपको;
'नूरम' इस पिंजरे के लिए ही तो लोग प्यार किया करते हैं।
113
प्यार धर्म की खींची लकीर नहीं देखता,
प्यार ऊंच नीच की दहलीज़ नहीं देखता;
प्यार दौलत की दीवार नहीं देखता,
प्यार रंग रूप की बयार नहीं देखता।
लेकिन.. प्यार चेहरे की झुर्रियां,
और बालों की सफेदी देखता है।
इस लिए कहता हूँ 'नूरम';
तेरी नज़्मों में है यह जो प्यार के किस्से,
तेरी नज़्मों में है यह जो प्यार के किस्से;
हकीकत के दुनिया में मोहोबत नहीं है।
114
तेरे मिज़ाज़ से हमने, धड़कने मिला रखी है,
ना रूठा करो 'नूरम', उलझाने दबा रखी है।
115
मेरा इश्क़ तेरी पायल की झनकार है 'नूरम';
[जो यकीन न हो] दौड़कर आ और सीने से लग कर देख।
116
जिंदगी है तो जीनी पड़ेगी, दिल है तो लगाने पागेगा;
इश्क़ है तो बताना पड़ेगा, 'नूरम' करो वादा, तो निभाना पड़ेगा।
117
आपको हमारी आंखें अच्छी लगती हैं, 'नूरम';
रात भर यह आपका तज़किरा जो करती हैं।
118
तुम्हें नया साल मुबारक, हमें हमारा हाल मुबारक नूरम';
तुम्हें नया यार मुबारक, हमें तुम्हारी याद मुबारक।
119
किसी गीत से लगे आप हमें, नूरम',
हम गुनगुना सकते हैं, गा नहीं सकते।
120
दिल की चोटों ने पूछ लिया, बेवफा तुमने यह क्या किया,
कि न लगा सको दिल तुम किसी और से, 'नूरम';
इसलिए हमने तुम्हारा, दिल ही तोड़ दिया।
121
मोहब्बत का भी मिज़ाज़, खास होता है 'नूरम'
आप मरते है जिन पे, उनको हमेशा ऐतराज़ होता है।
122
रूठकर हमसे न गुमसुम हो जाइये
'नूरम' सुनिये ज़रा सा तो मुस्कुराइए।
123
फक्त एक आवाज़ ही है, फ़ोन में निशानी तुम्हारी
'नूरम' डी.प. पे भी तुमने, अब हमसे मुँह मोड़ लिया है।
124
इतना भी ना निहारा करो ख़ुद को “नूरम”,
कि थोड़ा तो हक़, नाचीज़ का भी बनता है।
125
इतना भी ना संवारा करो ख़ुद को “नूरम”,
कि आइना ही ना आपसे शर्मा जाये कहीं ।
126
इस कदर भी ना देखा करो, ख़ुद को आइने में “नूरम”,
कभी आइना ही बोल पड़े 'माह-पारा' मुझे जला रही हो क्या?
127
बेशक तेरी सादगी में भी, हुस्न बेमिसाल है 'नूरम',
इस सबब तेरे शहर में, कुवारों का हाल बेहाल है।
128
इतना भी ना सादगी में रहा करो,
कुछ तो आराइश-ए-नुमायाँ किया करो।
माह-ए-रमज़ान मुसलसल है 'नूरम',
कुछ तो खुदा का खौफ किया करो।
129
कौन सी बात थी जो आपको पसंद आई नहीं,
मरते हैं आप पर या, आप के लिए जीते हैं।
130
कौन सी बात नहीं मानी, 'नूरम',
कौन सा हुक्म तामील किया नहीं।
आपने तंज़ कसा, "आप रहने दें",
और हमसे फिर जिया गया नहीं।
131
बस गये हो, आँखों में नींद बनकर,
किसी बंद लिफाफे की तकदीर बनकर।
मिलते हैं आँसू, उनको ही अक्सर 'नूरम',
जो करते हैं, मोहब्बत मुरीद बनकर।
132
एक कप चाय हो जाये, एक मुलाकात खास।
दो बिस्कुट दो बातें, हाथों में हाथ,
हसीन शाम और आप का साथ।
किसी झील किनारे, एक लॉन्ग वाक,
आपकी महकती जुल्फें, मेरे बहकते जस्बात।
गुलाब की झाड़ी में, आपके दुपट्टे का फसंना,
आप का शर्मा कर कहना, 'नूरम'! रहने दें आप;
मेरी छोटी सी हसरत, एक मुलाकात खास।
133
आप से जो प्यार मिला 'नूरम'
न जाने, वह इश्क़ था भी,
या था कोई फलसफा।
जिसे हम लफ़्ज़ों से तराशते हैं,
किताबों में संभाते हैं,
और अक्सर रिश्तों में तलाशतें हैं।
134
बात करते हो मोहब्बत की, और इतना भी नहीं जानते 'नूरम',
इश्क़ का तीर दिल में गुस्ता तो है, पर बाहर नहीं निकलता;
मोहोबत में आँखों में नमीं और दिल में दर्द तो होता ही है।
135
आपकी यादों का सफर,
लम्भा भी था और मुश्किल भी।
हम उलझते ही रहे और सुलगते ही,
'नूरम' उस पर आपकी बेरुखी,
हम संभालते ही रहे और तड़पते ही।
136
थक गए हैं राहे मोहब्बत पे चलते चलते,
पर मिलने को दिल बेकार भी है।
आपके दर्दे दिल से, हम नहीं बेख़बर,
'जाना' तीरे इश्क़ इस दिल के पार भी है।
अन्जामें मोहबत का, खुदा को मालूम, 'नूरम'
यही तो है मोहब्बत और यही मज़ा भी है।
137
वो राज़ ही क्या, दिल में दफन न हो,
वो दिल ही क्या, जिसमें दिलबर न हो।
मोहोबत खुदा से हो, या माशूक से 'नूरम',
वो महबूब ही क्या, जिसमें आग न हो।
138
उसी तरह निभाई है, होली की रस्म आपने,
जिस तरह खेला है, दिल से हमारे आपने।
जब हम आईने में बेरंग, खुद को देखते हैं,
'नूरम' हमें(बस)आपके बदले रंग ही दिखते हैं।
139
ख़ुशबू और पंखुड़ियाँ दोनों बिखर जाती हैं,
'नूरम' यह वक़्त है, कभी एक सा नहीं रहता।
बिकने लगे हैं कई रंगों में गुलाब भी अब ज़माने में,
कि लोग भी बदल लेते हैं रंग हर नए त्योहार पे।
140
उनके गुलाबी गाल, गुलाबों से लगते हैं,
हमें तो वो, ख्वाबों की ताबीर से लगते हैं।
पर गुलाब के अब, कईं रंग होते हैं 'नूरम'
कुछ गहरे, तो कुछ हल्के भी होते हैं।
141
लचकाते हैं यूँ कमर, हुस्न वाले रील्स में,
निकल जाती है जान, अब हर इक सीन में।
'नूरम' कोई कहे, इनसे संभाला करो ज़रा,
व्यूअर्स भी रखते हैं दिल, अरमानों भरा।
142
आपके आने का इंतज़ार भी नहीं है,
आपके जाने का मलाल भी नहीं है।
हम तो खुश हैं, इस एकतरफ़ा मोहब्बत में,
'नूरम' पर लगता है, आपको करार नहीं है।
💘💖143💘💖
इस सादगी पे कौन न मर जाये ए-खुदा,
'नूरम',हम बात मेहंदी के रंग के करते हैं,
और वो होली के रंग की।
144
यह सरहद पार की मोहोबत भी सिरदर्द है,
'नूरम' ना वीजा मिलता है और ना करार।
145
गोशा-गोशा तेरी सदाएँ, गोशा-ए-दिल में, चेहरा तेरा.
मासूम थी मोहब्बत मेरी, बस इतनी सी थी, मेरी ख़ता।
समझ न सके चालें तेरी, हम इशारों में मशगूल रहे,
'नूरम' दौर आख़िरी मोहब्बत का और आप वसूल रहे।
146
इंतज़ार करना मोहब्बत का, उनको गवारा नहीं था,
इज़हार करना मोहब्बत में, हमारा मिज़ाज नहीं था।
147
कितना चाहते हैं आपको, आपकी जान के सदक़े,
कितने नादान हो ‘नूरम’, आपका अंदाज़ है हटके।
148
‘नूरम’ बहती हुई नदी ने
बहते हुए आँसुओं से कहा,
मैं बहती हूँ प्यास बुझाने को,
तू बहती है दर्द जताने को।
मैं सूख जाती हूँ राह-ए-मोहब्बत पे,
तू सूख जाती है अंजाम-ए-मोहब्बत पे।
कुर्बान तो हम दोनों ही हैं ज़माने में,
मैं समंदर की पनाह में, तू झूठे फ़साने में।
149
सुना है ये दरिया तुम्हारे मुल्क से आता है,
सुना है ये हवा तुम्हारे शहर को जाती है।
हम पूछते हैं ख़ैरियत तुम्हारी बहते पानी से,
और भेजते हैं सलाम अपना इन हवाओं से।
150
किसी ने कहा चाँद, मुझसे रहा ना गया 'नूरम'
फिर उसने कहा बेवफा, तेरा चेहरा याद आ गया।
151
आते हो ख्वाबों में, बहुत सताते हो,
'नूरम' इतनी शरारत कहाँ से लाते हो।
152
My heart leaps twice
When I think of you
Should I go to doctor,
Or come to see you?
153
काश मैं पुकारूँ और तुम मेरे पास हो 'नूरम',
और सीने से लिपटने की वजह न कोई खास हो।
154
दिल था टूट गया है हमारा, तो क्या,
एक शक्श था रूठ गया है, तो क्या।
जान निकलेगी मार जायेंगे, तो क्या,
मर कर भी (आप) याद आये 'नूरम', तो क्या।
155
मोहोबत की देखलीज़ पे कदम है यह पहला,
इश्क़ का इम्तिहान है हमारा यह पहला।
जो हम जीते तो आप हमारे हो जाना 'नूरम',
और जो हारे हम आपके हो जायेंगे 'जाने-जाना'।
156
जो तोड़ दिया है तुमने, वो दिल है मेरा,
जो गुमा दिया है तुमने, वह सुकून था मेरा।
हद हो गयी 'नूरम' और यह तो हद हो गयी,
जो बाँट दिया है तुमने वह इश्क़ है मेरा।
157
जिनके ज़िक्र से, आ जाती थी आँखों में हया,
'नूरम' अब उनके नाम से आँखें भर आती हैं।
158
लाटा नाही आल्या तरी समुद्र किनाऱ्याशी जोडलेलाच…
'नूरम' तसंच, तुझ्या न बोललेल्या भावना माझ्या हृदयाशी।
159
भीगी आँखें बता रही हैं, बहुत याद करते हो,
पर हमसे मिलते हो, तो कुछ कहते नहीं हो।
ढीला बदन , खुश्क-मिज़ाज दिखा रहा है,
की आजकल सुकून से सोते भी नहीं हो।
खुद जल रहे हो हिज्र की आग में, 'नूरम'
और हमसे कहते हो मुहोब्बत करते नहीं हो।
160
यूँ कहर बरपाना किस लिए, हम तो बेइख़्तियार हो चुके हैं
अब इतना तड़पाना किस लिए, 'नूरम' हम तो आपके हो चुके हैं।
161
देर से आए हो और इतनी जल्दी जा रहे हो,'नूरम'
हमसे मोहब्बत बस दिखावे की निभा रहे हो?
162
शेर कहूँ ‘मीर’ का, या ‘ग़ालिब’ का कलाम कहूँ,
‘नूरम’ की नज़्म पढ़ूँ, कैसे दिल का हाल कहूँ।
किसी ज़ुल्फ़ सा उलझ गया हूँ आपके हुस्न में,
रुख़सार के करीब हूँ, लेकिन दीदार से दूर हूँ।
163
देर से आने की वजह कोई और है,
उन्हें मेरे दिल का रास्ता मालूम है।
पास आने की वजह कोई और है,
हमें उनके दिल का मिज़ाज़ मालूम है।
164
बदल गया प्यार तेरा, बदल गया संसार मेरा। 'नूरम'
तेरा कहना 'चला जा',और मैं जिस्म-ओ-जाँ से गया।
165
कब तक यूँ बातों से दिल बहलाएँगे,
कब आसार प्यार के नज़र आएँगे।
होगी चाह आपको भी हमसे मिलने की,
नूरम हम भी यूँ ही आपको तरसाएँगे।
165
बात पुरानी तो है पर ज़ख्म ताज़ा है,
यादें पुरानी तो है पर सिलसिला नया है।
166
कुछ तो बात है, प्यार में और गुलाब में,
दोनों लिए फिरते हैं, कांटे अपने साथ में।
167
हर फूल जो महके, गुलाब नहीं होता,
हर किसी से प्यार हो मुमकिन नहीं होता।
अफ़सोस महबूब ही मसलता है, दोनों को,
किस्मत को दोनों का (ही) साथ गवारा नहीं होता।
168
बस पूछ लिया है हाल तुमने जो मेरा,
अब हमें दवाओं की ज़रूरत कहाँ है।
रख दिया है हाथ जो तुमने मेरे ज़ख्मों पे,
अब हमें दुआओं की ज़रूरत कहाँ है।
169
रील बनाती हूँ, रियल लाइफ संभाल नहीं पाती,
अश्क बहाती हूँ, तेरी याद संभाल नहीं पाती।
असर में हूँ उन दिनों के जो (तेरे) साथ बिताए थे,
मेरे दिल के ये अधखिले जज़्बात, बता नहीं पाती।
(और) इस कदर छोड़ा है साथ उसने मेरा ‘नूरम’,
ज़ख्म इतना गहरा है, क्या कहूँ सुखा नहीं पाती।
170
वक़्त गुज़र जाता है, लेकिन बिताया नहीं जाता,
मसला दिल का हो तो, सिखाया नहीं जाता।
इक तरफ़ा मोहब्बत भी क्या ज़ुल्म है, 'नूरम'
उम्र गुज़र जाती है, लेकिन समझाया नहीं जाता।
171
बाहों में उनके अब वह करार नहीं,
ख़्वाबों में उनके अब वह बात नहीं।
नहीं है तबस्सुम उनके होंठों पे 'नूरम',
कहीं यह नई मोहब्बत के आसार तो नहीं।
172
तुमसे मिलने का वादा भी था,
बिछड़ने का कोई इरादा न था।
'नूरम', जिस डगर मुड़ गए तुम,
उस डगर मोहब्बत को आसरा न था।
173
ख़त का मज़मून पूछते हैं, हाल हमारा मालूम नहीं,
हम मर मिटे हैं जिन पर, उन्हें नाम भी मालूम नहीं।
किस कदर खड़े रहे हम, किस करवट हम बैठ जाएँ,
'नूरम' रहने दें या कुछ कहें, उन्हें फ़र्क़ भी मालूम नहीं।
174 👆(Dedicated)
उनका दिया एक ज़ख़्म ही था काफ़ी,
ख़्वाबों की हक़ीक़त, मैं हक़ीक़त से जागी।
यादों में डसती, तन्हाई की बिजली,'नूरम'
आँखों को खोया है, बस आँसू हैं बाक़ी।
175
हर कविता की एक कहानी होती है,
लफ़्ज़ों में लिखी एक पेशानी होती है।
कहानी लिखने वाले बस शक्श बदलते है,
'नूरम', हर कहानी में वही किरदार होता है।
176
इंस्टा 10K का सफ़र लंबा था, पथरीला था, कंटून भरा था।
कुछ दोस्तों ने लाइक किया, कुछ ने कमेंट पोस्ट किया।
जैसे कह रहे हों, बस थोड़ा और, एक रील और, एक स्टोरी और।
मंज़िल भी मिली, नए दोस्त भी, 'नूरम' कैसे अदा करूँ शुक्रिया।
177
किसी ग़ज़ल से शेर क्या कहें,
कैसे किसी कली से ख़्वाब कहें।
आप तो ख़ुद, महताब हो 'नूरम'
अब इससे ज़्यादा हम क्या कहें।
178
तेरा ख़याल आया, दिल को सुकून मिला,
फिर हमें उस सुकून में वजूद मिला।
सजा ली दिल ने तेरे एहसास की महफ़िल,
'नूरम', तेरे ख़यालों में प्यार बेशुमार मिला।
179
आँखों से इलाज करते हो,
और होंठों से दवा देते हो।
नब्ज़ दिल की छूते हो,
'नूरम' हाल बेहाल करते हो।
180❤️
तुझसे बिछड़ के मर जाएँगे, डरते हैं,
'नूरम' साथ तेरे जी न पाएँगे, सोचते हैं।
181❤️
कुछ लोग प्यारे होते हैं, हमने देखा है,
कुछ इतने मासूम होते हैं, सोचा न था।
182❤️
पेश-ए-ख़िदमत है दिल फिर एक बार,
टूटे दिल से बार-बार फ़रियाद आती है।
धोखे खाने से अक़्ल नहीं आती, 'नूरम'
याद आती है और बहुत ज़्यादा आती है।
183❤️
एक बार मना किया, दिल टूट गया,
दूसरी बार मना किया, मन उठ गया।
तीसरी बार सोचा, रब रूठ गया, 'नूरम'
चौथी बार खामोशी से रहना सीख गया।
184❤️
धूप-छाँव, रुख़सार पे तिल,
तरन्नुम अंदाज़, इश्क़ आग़ाज़,
आँखें गहरी, कहें कोई ग़ज़ल,
'नूरम' तुम से मोहब्बत बेवजह।
185❤️
दिल के टुकड़े बहुत हुए, पर वजूद न मिटा,
इश्क़ के मारे जानते हैं, यादों को संजोना।
टुकड़े-टुकड़े जोड़ के चाँद बना है, 'नूरम'
रातों ने तो सीखा है चाँदनी में गुज़ारा करना।
186❤️
अब पत्थर बन के चमके हैं, तो हैरान हैं वो,
मूरत बन के बैठे थे, तब ठुकराए बहुत गए।
मूरत बन के बैठे थे, तब ठुकराए बहुत गए।
187
सुना है चाँद में भी दाग़ है, चाँद भी बेदाग़ नहीं,
तेरे दाग़ हैं तिल मेरे लिए, तेरा चेहरा गुलज़ार रहे।
तुझसे मिलने की चाह है, बहुत कुछ मुझे भी कहना है,
यह इश्क़ है, 'नूरम', आग का दरिया है, याद रहे।
188❤️
सुना है चाँद में भी दाग़ है, चाँद भी बेदाग़ नहीं 'नूरम',
शायर बनना आसान है, आशिक़ बनना आसान नहीं।
189❤️
लोग पैर पड़ते हैं, वो मेरी आँखें पढ़ लेता है,
जहाँ लोग झुक जाते हैं, वो मुझे झुका देता है।
190❤️
वो दोस्ती भी बड़ी है, और वो प्यार भी बड़ा है,
'नूरम' जब रिश्तों में वफ़ा है, आँखों में हया है।
191❤️
कैसे रोकेंगे ख़ुद को तुम पे मरने से,
'नूरम' हर भौंरे की यही कहानी है।
192❤️
सूख गए हैं जो लाए थे गुलाब, तेरी राह तकते-तकते, 'नूरम',
अब कौन करेगा सिफ़ारिश हमारी, हाय! मोहब्बत के रास्ते में।
193❤️
Smoking kills the lungs, patience makes us vulnerable;
'nuRam' once kissing begins, love becomes unstoppable.
'nuRam' once kissing begins, love becomes unstoppable.
194💖
तुम साथ चलो, हालातों को हालात पे छोड़ दो,
'नूरम' जो बदल जाए वो मौसम है, मोहब्बत नहीं।
195💖
तुम चल रहे हो, नज़ारे चल रहे हैं,
तुम चल रहे हो, ज़माने चल रहे हैं।
तुम जैसे-जैसे क़रीब आ रहे हो, 'नूरम',
तुम्हारे बढ़ते क़दम फ़साने कह रहे हैं।
196💖
नहीं देखनी है सारी दुनिया, 'नूरम',
कि मैंने तुझमें ही दुनिया देखी है।
197💖
तेरे दीदार की इस क़दर लत लग गई है, 'नूरम',
कि रातों में उठ-उठकर तेरी तस्वीर देखते हैं।
198💖
तुमसे मोहब्बत से पहले पत्थरों से मोहब्बत करते थे,
'नूरम' पिघलते हैं पत्थर भी, ये आज़मा चुके हैं हम।
199💖
उसने चेहरे से जब पल्लू उसने हटाया होगा,
चाँद उसके जैसा है, सबने सोचा होगा।
और तेरा कलाम जब पढ़ा है उसने, 'नूरम'
उसका ही चेहरा सबको नज़र आया होगा।
200💖
आख़िरी बार देखिए हमको, आख़िरी बार उम्र भर के लिए, 'नूरम'
तब जो बिछड़े थे, अब मिले हैं; अब जो बिछड़े, फिर न मिलेंगे।
201
दुनिया में बहुत हैं तेरे हमशक्ल मगर,
तुझ पे ही जँचता है तेरा चेहरा मगर।
है उल्फ़त तुझसे इतनी, मेरे हमदम,
माफ़ किया, तेरा अंदाज़ मिला जिधर।
202💖
बिखरे थे मेरे दिल के टुकड़े, उसके तो बाल भी न बिखरे थे, 'नूरम',
अरमानों के साथ ख़ून भी सूख गया था, उसके तो होंठ भी न सूखे थे।
203💖
सबका अपना चाँद है, सबकी अपनी कहानी है,
एक चाँद था मेरा भी, 'नूरम' मेरी भी एक कहानी है।
ख़्वाहिशों के आसमाँ में रूह को रौशन करने वाला,
जब छुप गया वो तब जाना, कि ये बादलों की शैतानी है।
204
ग़म-ए-दिल था, सो मोहब्बत झेल गया,
वक़्त के मारे 'नूरम' कहाँ मरा करते हैं।
205💖
सादा-दिल था, 'नूरम', सो मोहब्बत झेल गया,
नाज़ुक-दिल क्या ख़ाक मोहब्बत किया करते हैं।
206
गरीबी बहुत बुरी शय है, उम्र का
लिहाज़ नहीं करती, और जज़्बात का भी नहीं।
इसमें मोहब्बत-सी तासीर है, 'नूरम'
ये बहाल भी नहीं करती और ख़ाक भी नहीं।
207💖
तुम साथ चलो, हालातों को हालात पे छोड़ दो,
'नूरम' बदलते मौसमों से ही मोहब्बत जवाँ होती है।
208💖
शादी एक लगान है, प्यार एक धोखा, 'नूरम'।
वो तुझे चाहती हैं, आज़मा ले, किसने है रोका।
209💖
मुस्कुरा देते हैं हम उनकी हर बात पर,
'नूरम', वो समझते हैं कि हम मासूम हैं।
उन्हें क्या ख़बर कि मुस्कुराहट के पीछे
दर्द भरे अल्फ़ाज़ और कितने राज़ हैं।
210
अकेले रह गए, जिनका कारवाँ अपना था,
मुनाफ़िक़ों के भी पास अपना दस्ता था।
कभी चौराहा आया, फिर भी वो साथ रहे,
'नूरम', हमारा भी तो एक ही रास्ता था ?
211
उन्हें शौक है उम्र-दराज़ होने का,
उनसे कहो हमारे हिस्से की भी जी लें।
हमारी ज़िंदगी जीकर तो देखें, 'नूरम'
कैसे जीते हैं आप, ज़रा हम भी देखें।
212
जिस ख़ाक से बना है जिस्म तेरा,
उसी ख़ाक का एक ज़र्रा है दिल मेरा।
धड़कता है तेरी हर नब्ज़ के साथ, 'नूरम',
तेरी तबस्सुम पे थिरकता है दिल मेरा।
213
मोहब्बत तो भीख में भी मिले, क़ुबूल है,
मगर इस राह पर चलने के कुछ उसूल हैं।
यह ख़ुदा का वो हसीं तोहफ़ा है, 'नूरम',
ये मिली तो रब मिला, वरना सब फज़ूल है।
214
जब हमें मोहब्बत की आदत हो गई,
उन्हें तो जैसे हमसे नफ़रत हो गई।
जिस्म तो मिलाया था दोनों ने, मगर,
'नूरम',आज रूहों में बग़ावत हो गई।
215
हक़ीक़त है दुनिया की यही,
कोई सो जाता है, कोई आता है।
'नूरम',छोड़ जाता है दास्ताँ अपनी,
अपनों को तन्हाइयों में रुलाने को।
216
तरतीब से उछाले थे अल्फ़ाज़ उसने,
और हम पर बरसे तो शिहाब से लगे।
कुछ दिल पर गिरे, कुछ जिगर में उतरे,
'नूरम', जहाँ भी लगे, पर हिसाब से लगे।
217
सन्नाटों ने जो कहानी कही,
वो हमें सुनानी नहीं थी।
हम दीवारों को समझा के आए थे,
'नूरम', उन्हें पसंद नहीं नादानी।
218
मोहब्बत के खेल में,
कहाँ कोई जीता है?
जीता वो, जो सब हारा है,
'नूरम' जो हारा, बेसहारा है।
219
वो कल था कि मोहब्बत का बुख़ार था उन्हें,
'नूरम', आज तबीयत संभली, तो संभल गए वो।
220
दिल का अरमान पूरा भी हो सकता था,
तू आज उसका है, मेरा भी हो सकता था।
बेहयाई की रस्म निभाई न गई उस रोज़, 'नूरम',
इश्क़ का इम्तिहान तो दोबारा भी हो सकता था।
221
वो शख़्स अपना भी है और वो पराया भी,
वो पसंद भी है और नापसंद भी,
तरतीब से उछाले हैं पत्थर उसने,'नूरम'
घर बनाया भी है और दिल तोड़ा भी।
222
अहद-ए-वफ़ा ही रस्म-ए-मुस्तर्द हुई,
और हसीनों को तो सिर्फ़ मोहब्बत हुई।
अब ये सुख़न करते हैं ख़ुदा-ए-मोहब्बत से,
'नूरम', अब तेरी मोहब्बत पर भी तर्दीद हुई।
224
वो मकां अब भी मेरा है या मुसाफ़िर हूँ कोई, 'नूरम',
दिल में वो बसा भी है, और दिल में रहता भी नहीं।
225
उसने बस्ती तो उजाड़ी थी मगर, जाते हुए,
क़दमों के निशां दिल में छुपा कर रख दिए।
उसने हस्ती ही मिटा दी मगर, हँसते हुए,
इन आँखों के आँसू भी सुखा कर रख दिए।
226
मोहब्बत में इल्ज़ाम देना, कहना
आपके बहकने का इनाम यह है।
इश्क़ जगा कर यूँ मुस्काना, 'नूरम',
(तेरी) ज़ुल्फ़ के उलझने का कमाल यह है।
227
लफ़्ज़ों में नूर और काम भी है रोशनी का,
उम्मीद है चिराग से घर चलेगा मुफ़्लिस का।
वह राख चाहिए जो रोशन रूह को करे,
'नूरम' तभी तो घर बचेगा मिस्कीन का।
उम्मीद है चिराग से घर चलेगा मुफ़्लिस का।
वह राख चाहिए जो रोशन रूह को करे,
'नूरम' तभी तो घर बचेगा मिस्कीन का।
228
दवा और दुआ से आगे का यह दर्द है,
इश्क़ कमबख़्त, बहुत आगे का मर्ज़ है।
नाकाम हुईं सब कोशिशें, नाकाम सब अमल हैं,
मोहब्बत के सैलाब में तिनके को भी लर्ज़ है।
यहाँ लिहाज़ को तहज़ीब से नहीं कोई ग़र्ज़ है,
'नूरम' यह वह अर्ज़ है, जिसमें ख़ुदा भी ख़ुदगर्ज़ है।
229.
A furry fox, with eyes of desire,
Stealing the calm, lighting fire,
It slipped through the window, silent and bold,
Turning the midnight to crimson and gold.
I pounced, my heart a hammer awake,
For the wild, beautiful spark it could make.
230
उसने जोड़ा है खुशबू को शीशी में,
जिसने फूलों को टहनी से जुदा दिया।
वो अब चला रहा है खुशबू की दुकान, 'नूरम'
जिसने गुलाबों के ज़ख़्मों को हरा कर दिया।
231
वो देखता है मुझको मगर बेहया नहीं,
मैं देखने लगूं तो मुझे देखता नहीं।
दबी दबी सी है हया आंखों में उसकी
'नूरम' मैं मुंतज़िर हूँ, वो छेड़ता नहीं।
232
आईने में देखी परछाई, तो तुम याद आ गए,
खनकी मेरी चूड़ियाँ जब, तुम याद आ गए,
तंग हुई चोली तो, तुम याद आ गए, 'नूरम'
नम हुई मेरी आँखें तब, जब तुम याद आ गए।
233.
हम तेरे शहर में आए, तो खफा मत होना,
तेरी चौखट पे न आएंगे, चले जाएंगे।
हम बिखरे हैं जरा सा, संभल जाएंगे,
जब याद वो गुजरे जमाने आएंगे।
तुझे छू के आने वाली हवा, अक्सर कहती है
'नूरम' वो है यहीं कहीं, जरा ठहर कर आएंगे।
234.
तेरी मोहब्बत में होकर बर्बाद, कहते हैं,
कहते हैं वह बात जिसे सब राज़ कहते हैं।
वो बना रहे थे मौज़ू-ए-मोहब्बत हमसे,'नूरम'
जो बराए-मेहरबानी इश्क़ किया करते हैं।
235.
मेरे जागे से ख्वाबों में तुम हो,
मेरे गीतों की शोखी में तुम हो,
कुदरत के शाहकारों में तुम हो,
चाँद की रोशनाई में भी तुम हो,
अगर मैं साज़ बन जाऊं कोई,
तो 'नूरम', उस साज़ के तार तुम हो।
236.
मिल के भी जो तेरा न हुआ,
तू उसके लिए परेशान है क्या?
क्यों तकता है आसमान को तू,
'नूरम', तेरा महबूब ख़ुदा है क्या।
237.
देर हुई मनाने में, अब मलाल क्या करें,
मैं दरिया आग का हूँ, प्यास कैसे बुझे।
सुना है रंजिशें होती नहीं रूहों में, 'नूरम',
उसने चाहा बस जिस्म था, तो सवाल क्या करें।
238.
आसमान से उतरी कोई अप्सरा लगती हो,
'नूरम' के ख़्वाबों का तब्सिरा लगती हो,
कंगन खनका कर जब मुस्कुराती हो तुम,
मन मंदिर में होने वाली आरती लगती हो।
239
आपकी तस्वीर में भी जो, थोड़ी सी जगह मिल जाये,
ये जमाना जल जाये, 'नूरम' की तकदीर बन जाये।
240
किनारे की शांति, यूँ तो खामोश है पर शांत नहीं,
'नूरम' उसे भी इंतज़ार है किसी एक लहर का।
241
कुछ तो हमारे नर्म दिल का लिहाज़ किया होता,
जाने तमन्ना ! आपने थोड़ा तो बर्दाश्त किया होता।
क्या हम आपसे मोहब्बत का भ्रम भी न रखें? 'नूरम'
किस्सा जो शाद था, आपने यूँ आम न किया होता।
242
बेटियां करें घमासान, अब जज भी है हैरान,
ससुराल बन रहे शमशान, मेरा भारत महान।
243
डूब रहा था सूरज जब, मेरी हसरतों का उदय हो रहा था।
वह देख रहा था तिरछी नज़रों से, 'नूरम' असर दिल पे हो रहा था।
244
मेरे जागे से ख्वाबों में तुम हो,
मेरे गीतों की शोखी में तुम हो,
कुदरत के शाहकारों में तुम हो,
चाँद की रोशनाई में भी तुम हो,
अगर मैं साज़ होऊं कोई तो 'नूरम',
उस साज़ के तार तुम हो।
245
तेरी मोहब्बत में होकर बर्बाद, कहते हैं,
कहते हैं वह बात जिसे सब राज़ कहते हैं।
वो बना रहे हैं मौज़ू-ए-मोहब्बत हमसे, 'नूरम'
जो बराए-मेजबानी इश्क़ किया करते थे।
246
सब अपनी ही ख़ामोशी में, मुद्दतों से बेक़रार बैठे हैं,
'नूरम' यह दौर नया है, यहाँ सब इंतज़ार में बैठे हैं।
247
महताब की कसम महताब लगती हो,
केसर की कसम कश्मीरी गुलाब लगती हो।
दरिया-ए-इश्क़ में वो कश्ती हो तुम,
'नूरम' जो मंज़िल का ख़्वाब देखती है।
//\\**** ॥ नूरम मिश्री ॥ ****//\\
१
नयन की सुंदरता नहीं, पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को भावे, वही सच्चा प्यार॥
२
नयन की सुंदरता नहीं, पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को ध्यावे, वही पाये सार॥
३
नयन की सुंदरता नहीं पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को पुकारे, उसका बेडा पार॥
४
नयन की सुंदरता नहीं पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को निहारे, वही प्रीत अपार॥
५
तेरे वचन पे चलते हैं हम, तेरी भेड़ बन कर।
भीड़ से अलग है हम, 'नूरम' विश्वास के पथ पर॥
६
सुंदर दिखना आसान है, विश्वासी होना मुश्किल।
प्रभु प्रेम जटिल है 'नूरम', पर दूर नहीं है मंज़िल॥
७
प्रभु तेरा मार्ग कठिन है, पर हमें नहीं है जल्दी।
पौड़ी पौड़ी चढ़ते जाएं, 'नूरम' आगे तेरी मर्ज़ी॥
९
जितना भी तू दे मुझको, मेरी रहती जेबें खाली।
मुझको अपने धाम में रखले, बन के रहूं में दासी॥
१०
आर पार देखूं अब, दिखे सूरत तेरे निराली।
जब भेद रहा न कोई, दुनिया कहें दिवानी॥
११
आँखों में प्यास हो, माथे पे सजती राख हो,
जन्मों का विश्वास हो, अक्षर-अक्षर हो पंखुडी;
कंठ में सुर सलोना, मन में जिसके धुन पक्की।
रूह में उसके रब रहता, हर-दम रहता रमी॥
१२
वो राज़ ही क्या, दिल में दफन न हो,
वो मसीहा ही क्या, ताज काँटों का न हो।
मोहोबत खुदा से हो, या महबूब से 'नूरम',
वो मसीह ही क्या, जिसमें आग न हो।
१३
कविता : लेंट✝
येशु में विश्वास हो, माथे पे सजती राख हो।
आँखों में प्यास हो, वचन से हो वाणी सनी॥
बोलो जय जय मसीह.. ॥
क्षमाशील सवभाव हो, नियमित बाइबिल अभ्यास हो।
आज्ञाओं का पालन करता, हर-दम रहता रमी॥
बोलो जय जय मसीह.. ॥
कंठ में सुर सलोना हो, मन में धुन पक्की हो।
रूह में तब 'नूरम' रहता, कहलाता विश्वासी धनी॥
बोलो जय जय मसीह.. ॥
0 Comments