शायरी संग्रह 'दिल का मौसम'

 .

💖         मेरे दिल का मौसम          💘
1
न चलो यूँ बलखा के, हुस्न वालो कि 'नूरम' 
नाचीज़ भी रखते हैं, दिल अरमानों भरा।

2
इश्क़ कौन चमन है, हम से पूछो 'नूरम' 
दो काँटें क्या चुभे,कहते हो दर्द हो उठा।

3
दीवाना हूँ आपके हुस्न का
'भौरा' मत समझ मुझे 'नूरम'  
तलबगार हूँ आपके प्यार का 
आवारा मत समझ मुझे।

4
मत दे इतने ज़ख्म, ए-संगदिल 'नूरम'
ज़ख्म भी परेशां है, कहाँ से उठे ।

5
जब हम खफा थे तब उन्हें, खबर भी न थी 'नूरम' 
अब हमने हल पूछा है, तो कहते हैं तुम बेवफा हो ।

6
खुदा बचाये इन हसीनों की, आदाओं से 'नूरम' 
पागल बनाते हैं और लब पे अलफ़ाज़ भी नहीं।

7
हम भी ग़ालिब होते, इस दौर के 'नूरम' 
पर आपका दिया दर्द, शायद कुछ कम था।

8
कैसे भुला दें इन गमों को 'नूरम' 
यही तो यादें है आपकी जिनसे  
दिल को सजा रखा है हमने। 

9
आपकी मुस्कुराहट को, इकरार समझें  
'नूरम' या फिर, हँसना मेरी दीवानगी पर।  

10
चलाये जा मोहब्बत, यूँ ही संगदिल    
'नूरम' मेरे आँसू फिर भी ग़ज़ल कहेंगे।

11
होती नहीं अब आँख भी नम 'नूरम' 
गम को भी मेरे किसकी नज़र लगी।

12
वोह जो दाद दे रहें हैं, मेरी शायरी पर 'नूरम' 
कोई उनसे कहें हम, हाल-ए-दिल कह रहे हैं ।

13
होती नहीं पतझड़ में शाख हरी, 
पर हम आप पे ए'तिबार कर बैठे; 
हम तो आप के दीवाने हैं 'नूरम', 
बिन मौसम का प्यार कर बैठे।

14
मुझे जलाने से पहले, मेरा दिल निकाल लेना
'नूरम' बड़े नाज़ुक है वों, जो दिल में रहते हैं।

15
तुम रूठ जाओ, तुम्हें हक़ है, 
पर हम क्या करें 'नूरम'
हमने तो मोहब्बत की है।

16
सम्भल के रहिये जो, दिल तोडा है किसी का
'नूरम' टूटा शीशा भी, खंजर हुआ करता है।

17
कभी कभी दिखा करो झरोंखों से भी 'नूरम'  
कि कभी ईद वक़्त से पहले भी आना चाहिए।

18
यूँ तो रोज़ों में, बंदिशें है कईं
पर 'नूरम' आप को देखना 
कोई गुनाह तो नहीं।

19
कभी फुर्सत में मिलो किताबें-ए-गम सुनाएँगे 
'नूरम' चार मुलाकातों में कितने हर्फ़ बतला पाएंगे ।

20
हमने चाहा है तुम्हें, चाँद सितारों से आगे
'नूरम' क्या मालूम था, तुम भी दूर हो जाओगे । 

21
उनकी हर ख़ता माफ़ की, हमने, समझ कर आख़िरी 
'नूरम' आज हमें अफ़सोस है,कि अब है साँस आख़िरी।

22
ना आप मिलते, न हम लर्ज़ाते 'नूरम' 
न खुश फेहमी होती, न गलत फेहमी होती। 

23
जाँ भी देदें आपके एक इशारे पर 'नूरम' 
बशर्ते कफ़न में आँचल आपका नसीब हो।

24
शुक्र है कि मिलते हैं अब, हमसे नज़रें झुका के वो
'नूरम' नशे में झूमते देखा है, नज़रें मिलाने वालों को।

25
कैसे कैसे बनायें इंसाँ, तूने मुझे सताने के लिए 
'नूरम' सीना बचता हूँ तो, पीठ कराह उठतीं है।    

26 
आपकी मोहब्ब्त में, मुकाम मिला कुछ ऐसा 
'नूरम' साहिल पे तो हैं, पर मछली की तरह।  

27
हम तो काबिल न थे, आपकी मोहब्बत के 'नूरम'  
उनका क्या हुआ? जिनसे आपको मोहब्बत थी।

28
न मोत की आस है, न ज़िंदिगी की प्यास
'नूरम' यह कैसा साहिल है, जो तूफ़ाँ के पास है।

29
वो इतना बरसे कहीं, की दिल भर गए 'नूरम' 
मेरे सहरा-ए-दिल पे, एक बूँद भी नहीं। 

30
ज़रा देखो इन ग़मों को, परेशां करते है धड़कनों को; 
नादाँ इतना भी नहीं जानते, 'नूरम' दिल में तुम रहते हो।

31
मुझे तड़पा के चैन आता है जिन्हें,
'नूरम' खुदा हुस्न लेकर दिल दे उन्हें।

32
मेरी चाहत से तू है, तेरे हुस्न से मैं नहीं,
मैं लिखूँ तो तू ग़ज़ल है, 'नूरम' वरना तू हर्फ़ नहीं।

33
गैरों के लिए है तेरी, ज़ुल्फ़ों की कली घटा,
'नूरम' न जाने यह बिजली, मेरे लिए क्यों छुपा रखी है।

34
कैसे जी पाएँगे हम, आप से जुदा हो कर,
'नूरम' आप जो धड़कते हैं, सीने में दिल बन कर।  

35
वो जो पास नहीं हैं,पर दिल के हैं करीब
तबस्सुम जिनके लब पर हमारी ग़ज़ल सुनकर 
'नूरम' उनसे कहिये अब फासले हैं पलभर

36
हम उनकी खुशी का, सामान हो गए 'नूरम' 
पर जब हमने पुकारा, तो घर मकान हो गए।
 
37
न जाने इश्क़ में क्या राज होता है 'नूरम'  
मोहब्बत के सर पे हमेशा इलज़ाम होता है।
हिचकियाँ और सिसकियाँ साज़ होता है,
आप जगा के इंतज़ार आशिक़ खाक होता है।

38
कुछ इस तरह मिला, गम कतरा कतरा 'नूरम' 
कि कब दिल डूबा कब हम डूबे, पता ही नहीं चला।

39
खुदा बचाये इन हसीं तितलियों से,  
जिनपर कलियाँ ऐतबार करती हैं 'नूरम'
रंग बहार, शोखियाँ मौज-ए-तबस्सुम, 
ये लूट आ'माल-ए-चमन फरार होती हैं।

40
क़लम-बंद-करने की ख़ातिर, आपने हमें मिटा डाला 'नूरम'  
चलिए इसी बहाने आपने, हमें लफ़्ज़ों में बदल डाला।

41
तुम पास न थे, तो गम शुदा थे 
'नूरम' अब शादीशुदा हैं
तो क्या कम है।

42
आप मेरा जुनू हैं पूरे कॉलेज को खबर है 'नूरम' 
बस हमें मालूम नहीं और आप बेखबर हैं।

43
द्वार खड़ा मादक यौवन 'नूरम' 
फिर भी तुम में कितना बचपन।

44
मुक्कदर ने छीन ली मोहब्बत मेरी, पर 
'नूरम' सजा दी आपने, दिल लगाने की।

45
आजाओ बैठो पास हमारे, हम भी ग़म ग़लत करें 
कब तक पिलाओगे गैरों को 
'नूरम' कभी तो नज़र-ए-करम करें।

46
वो आये महफ़िल में इस तरह रौशन-रौशन; 
जल उठा दीवानों का दिल रौशन-रौशन। 
शमा-ए-महफ़िल क्या रखते उनके सामने 'नूरम'
लग रहा था जिनका चेहरा सबसे रौशन-रौशन।

47
माना आपकी मोहब्बत के काबिल नहीं हैं हम,
'नूरम' पर देखें हमें, हम मर रहें हैं ज़रा ज़रा सा।

48
हमारी ज़िंदगी सफर नहीं, 
एक सड़क बन गई है 'नूरम'।
आप आते हैं ब्रेक लगते हैं, 
अरमान जागते हैं, चले जाते हैं।

49
जो हो दिलों में रंजिश तो ईद क्या करें,
'नूरम' हो इश्क़ नाराज़ तो दीद क्या करें।

50
कहाँ तक बचते हसीनों से,
आखिर आँख लड़ ही गई।
इज़हार किया मोहब्बत हुई,
'नूरम' ज़माने की नज़र लग ही गई। 

51
हर शख्स मुनाफ़िक़ निकला मेरे दायरे में; 
'नूरम' हमने दायरे बड़ा के भी देख लिया।
और सुकून तब मिला, रूह को हमारी, 
जब उनकी यादों को भी निकल के देख लिया।

52
वह शख्स अब मिलता नहीं, कहता था रहेंगे आँख बनकर  
पर न जाने क्यों अब हम, संभल कर चलते भी नहीं।

53
खुदा न दे हुस्न उन्हें, जो आशिकों की कदर न करें
'नूरम' जगाकर आरज़ू सीने में ओरों से बात करें।

54
आपकी मोहब्बत में जफ़ा में का ज़िक्र लगता है
'नूरम' अब हमें बाज़ार भी घर सा लगता है।

55
मत कहो बेवफा उन्हें 'नूरम' 
बस इक मुद्दत से रूठे हैं वो।

56
आपके इंतज़र में पलकों को बिछा दूँ,
आप जो हाँ कहें तो सीने से लगा लूँ।
जन्नत जाने से पहले आपकी रजा लूँ; 
'नूरम' जो न कहें तो खुद तो मिटा लूँ। 

57
आपकी सादगी में भी गुरूर है 'नूरम',
कह दो यह हमारी मोहब्बत का गुमान है।

58
जा रख तेरी खुशबू, तेरे पास गुलाब 'नूरम',
मैं अपने काँटों को महकना सिखा रहा हूँ।

59
मकबरे दिल के धड़कने पर, 
अरमानों का कफ़न चीर कर;
जब बेवफाई मुस्कुराती है 'नूरम'
हमें सिर्फ आपकी याद आती है।

60
दिल को शीशे में उतार कर,
बेरुखी का ढक्कन लगा लिया;
'नूरम' आपने न अपना बनाया,
न किसी ओर का होने दिया। 

61
न आये कल शाम जो, चलो माफ़ किया 'नूरम';
जनाज़े पे ज़रूर आना, वरना दिल रुकेगा नहीं। 

62
कभी उनको कभी वक़्त को, हमारी कदर न हुई 'नूरम';
हम जिये कुछ इस तरह, कि ज़माने को खबर न हुई।

63
आपसे दिल लगाके, हमें क्या मिला? 'नूरम',
न हम जी सके पूरा, और न पूरा मर सके।

64
न मांगी थी मोहब्बत हमने, न माँगा था आपसे प्यार 'नूरम'
बस इतनी थी हसरत हमारी, कि देखें आप को एक बार।

65
संभल के इन हसीनों से, यह खूबसूरत बलाऐं हैं;
प्यार से डसती हैं 'नूरम', इनकी अलग निगाहें हैं।

66
हमने नया नाम दिया- दीवाना,
हमने नयी पहचान दी- परवाना। 
गम चबाने का सिखाया सलीका, 
जाम पीने का दिया सकीना 'नूरम'।
कहा कैसे आपने- खुदगर्ज़ हसीना,  
अस्तग़फ़िरुल्लाह वो नाज़नीना।

67
सुबह से शाम तक इंतज़ार करूँ,
शाम से सुबह तक याद करूँ;
रस्म-ए-मोहब्बत है अभी बाकी,
'नूरम' कैसे आपका दीदार करूँ।

68
आपसे जो रिश्ता है 'नूरम', 
इसका कोई बाणी नहीं 
इबादत कहें या अक़ीदत।

69
आपसे जो दर्द मिला, लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता, आँखों से होता है,
कोई जो मेरे गीतों के मायने पूछता है तो 'नूरम' क्या बताते हो?

70
मेरे मेहबूब तेरा तड़पना नहीं बनता,
बार बार परवाने का मरना नहीं बनता;
कुछ तो हया होगी कायनात में 'नूरम',
मोहब्बत का नाकाम होना नहीं बनता।

71
हमें इश्क़ सिखा के खुद भूल गए 'नूरम',
ऐसे तो मुर्शिद के नुमायाँ नहीं होते। 

72
इरादे तो नेक है, पर ख्याल अनेक हैं,
आप से मोहब्बत का सोचा नहीं अभी;
'नूरम' किस को दें दिल, दिल तो एक है। 

73
घर-बाहर, सुबह से शाम तक, आप का ही तस्सवुर है हमें;
यकीन न हो 'नूरम' कॉलेज की, हाज़िरी बही निकल के देख लें।

74
कुछ इस तरह कटती है शामें अब 'नूरम'
लगता है बे-सबब सुबह हो जाती है।  

75
सुना है आईना भी आपके दीदार को तरसता है,
'नूरम' हम बे-वजह, हसरत-ए-दीदार को बैठे हैं।

76
दस्तान-ए- इश्क़ एक ऐसा फ़साना है, 
जिसे बताना भी है और छुपाना भी 'नूरम'
ये वह फन है जिसके, मेज़बान सब है, 
क़दरदाऩ कईं और मेहरबान कोई नहीं।

77
सुना है मोहब्बत आग का दरिया है,
हम तो जल गए, हिज्र की आग में। 
'नूरम' और आप तैर के निकल गए !

78
कहते हो  मोहब्बत गुनाह नहीं,
'नूरम' तो आप करते क्यों नहीं?

79
लैला ने कैस से सिर्फ एक बार कहा, 
और वो मजनू हो गया 'नूरम',
  और यहाँ उम्र बीत गई, आप को समझने में।

80
इश्क़ हद से गुज़र जाये तो नसीब बनते हैं, 
गम हद से गुज़र जाये तो 'नूरम' बनते है।

81
किसी गीत से लगते हैं आप हमें, 
'नूरम' बस हम गुनगुना नहीं सकते।

82
आप किस्मत में ना सही ख्वाबों में तो हैं, 
हमने तो आपका दिल चुरा लिया है 'नूरम' 
आप भी तसव्वुर में हमें सज़ा दे सकते हैं।

83
कुछ तो हुआ है, कुछ ठीक नहीं लगता, 
घर पे अब हमारा दिल नहीं लगता। 
कॉलेज से आने का, मन नहीं करता, 
'नूरम' हमें इश्क़ हुआ, आपको नहीं लगता।

84
काली तेरी गुत, हुलारे मारदा कला परांदा,
काला सूट ते आँखें उत्ते काला तिल नीं। 
चान्न वर्गा मुँह तेरा 'नूरम' उतों काली रात नीं।

85
सरेआम कर दिया मोहब्बत को, कोई इल्ज़ाम तो दिया होता।
लिहाज़ किया होता ज़माने का, रस्मन आदाब ही कहा होता।

86
हम खुद को बहलाते हैं, खुद के सुकून के लिए,
हर बार वापस आते हैं, आपने प्यार के लिए। 
मोहब्बत असर या अम्ल नहीं है, 'नूरम', कैसे बताये,
हर सुबह आज़ाद करते हैं, आपको अपने जमाल से।

87
सफर-ए-शायरी ऐसा चला, साज़ भी मिला, सोज़ भी; 
यार भी मिला, प्यार भी 'नूरम' बेकरार भी हुए, बेरोज़गार भी।

88
साँभ के रखा है, प्यार, आप के लिए, जब मिलोगे दे देंगे, 
'नूरम' वरना अगले, जन्म के लिए रख लेंगे।

89
आपको याद करने वाले तो बहुत हैं,  
हम तो यादों में रोने वालों में से हैं।
मोहब्ब्त का सबूत मांगते हो 'नूरम', 
हम तो आपके चाहने वालों में से हैं।

90
कुछ दिनों की मोहब्बत, कुछ दिनों में भूलती नहीं,
ज़माने लगते हैं 'नूरम', फिर अक्स ढूँढ़ने में।

91
निसबत-ए-खास है कोई मुजस्समें से,    
वरना कौन यूँ रोता है इस ज़माने में?
कब्र में भी सुकून से रहने न दिया 'नूरम' 
रो-रो के क्या हाल कर लिया दीवाने ने।

92
दिललगी नहीं मोहबब्त सच्ची है, आपको महबूब जान लिया 
'नूरम' हम भी इश्क़ कर के देखेंगे, अब हमने भी ठान लिया।   

93
आपका दीदार साफ़ था, हमने करवट बदल के देख लिया,
'नूरम' आप चाँद से लगे ख्वाब में, हमने चुपके से चूम लिया।

94
आप रूह को पसन्द हो, आपसे मोहब्बत का पूछ लिया, 
'नूरम' कैसे यकीन दिलाएँ, आपने यूँही हमें ठुकरा दिया। 

95
आपका झिड़कना माफ़ है, अब हमने खुद को समझा लिया,
'नूरम' ज़माना हँसता रहा है दीवानों पर, बुरा मनाना छोड़ दिया। 

96
बे-फ़िक्री से निकला करो अब आप, हमारी परवाह न किया करो, 
'नूरम' हमने मस्नूई* अदब के उस शहर में, अब जाना छोड़ दिया।
*artificial, fabricated, counterfeit, false 

97
आज कल, यहाँ नहीं, अभी नहीं, से आगे का सफर करना है।    
मोहब्बत की हद क्या है, कैसी है, 'नूरम' वोह विज्दान* करना है ।
*ecstatic condition, euphoria

98
मुफ़लिसी के दिनों में भी, मायूसी के दिए न जलेंगे।
'नूरम' यह जशन-ए-दिवाली, आपके खत जलाकर मायेंगे। 

99 
मोहब्बत की कसम, पूरी कर न सके  
किनारे करके आपको, हम जी न सके।
कुछ तो ज़रूर होगी मजबूरी, आपकी भी 
'नूरम' आप भी प्यार हमसे कर न सके।

100
मोहब्बत का भी मिज़ाज़, खास होता है 'नूरम'  
हम मरते है जिन पे, उनको हमेशा ऐतराज़ होता है।

101
किसी शिहाब* सा गिरा एक ही सवाल हमारा,  
जितना याद करतें हैं आप भी करते हो क्या?
सिफ़ारती** जवाब आपका खुद से पूछ कर देखलो; 
आप के आपे में हैं 'नूरम' जानते हो जवाब हमारा।
 *falling star, a meteor, comet
**diplomatic

102
हसीनों की ज़ात, आराइश* खाली,वादे खाली; 
आशिकों की ज़ात, बोतलें खाली, जनाज़े खाली; 
मोहब्बत एहसास, दिल खाली, ज़ेहन खाली; 
गुमशुदा एहसास, रस्में खाली, बातें खाली;   
बेदर्द एहसास, जेब खाली, 'नूरम' खाली।
*cosmetic

103
बहुत प्यारी है तेरी आँखें, जिनमें मेरा इंतज़ार है, 'नूरम' 
सुबह तलक जाएगी है यह, इनमें रोशन मेरा प्यार है। 

104
नींद में ख्वाब, ख्वाब में तुम, 'नूरम' 
क्या कभी हकीकत मैं मिलेंगे हम? 

105
बहुत कुछ सीखा है हमने तेरी चाहत में, 'नूरम' 
कि छलक जाते हैं जाम अक्सर मोहब्बत में।

106
एक चाँद है जो रहता है मेरे दिल में 'नूरम' 
पर कभी कलबी दिख जाता है मुझे दिन में।

107
सर्द रात गर्म सासें प्यार का बुखार होना ही था, 
तुम मानो या ना मानो 'नूरम' तुम्हें हमारा होना ही था। 

108
आपके छूने से सिहर जाते हैं हम, दूर जाने से ठिठुर जाते हैं, 
'नूरम' हमें मोहब्बत मसला दिल का नहीं लगता।  

109
यह इश्क़ भी क्या हाल बना देता है, 
'नूरम' किसी के हाथों में हाथ, 
किसी के हाथों में कटोरा थमा देता है। 

110
मेरे बाद किसको सताओगे, मेरे बाद किसको रुलाओगे; 
'नूरम' जब हम न होंगे पास में, तो किसको मनाओगे। 

111
चलो वो इश्क़ करें जिसमें दर्द न हो, 
'नूरम' बा-असूल हम हो  बेफिक्र तुम हो।
जिसमें हर सुबह तेरे लबों पे मेरा ज़िक्र हो,
जिसमें हर शाम मेरे लबों पे तेरा नाम हो। 

112
मेरा प्यार आपको पिंजरा लगता है,अब कैसे समझाए आपको; 
'नूरम' इस पिंजरे के लिए ही तो लोग प्यार किया करते है। 

113
प्यार धर्म की खींची लकीर नहीं देखता, 
प्यार ऊंच नीच की दहलीज़ नहीं देखता; 
प्यार दौलत की दीवार नहीं देखता, 
प्यार रंग रूप की बयार नहीं देखता। 
लेकिन.. प्यार चेहरे की झुर्रियां, 
और बालों की सफेदी देखता है। 
इस लिए कहता हूँ 'नूरम'; 
तेरी नज़्मों में है यह जो प्यार के किस्से, 
तेरी नज़्मों में है यह जो प्यार के किस्से; 
हकीकत के दुनिया में मोहोबत नहीं है। 

114
तेरे मिज़ाज़ से हमने, धड़कने मिला रखी है, 
ना रूठा करो 'नूरम', उलझाने दबा रखी  है।

115
मेरा इश्क़ तेरी पायल की झनकार है 'नूरम';
[जो यकीन न हो] दौड़कर आ और सीने से लग कर देख।

116
जिंदगी है तो जीनी पड़ेगी, दिल है तो लगाने पागेगा; 
इश्क़ है तो बताना पड़ेगा, 'नूरम' गर करो वादा तो निभाना पड़ेगा।

117
आपको हमारी आंखें अच्छी लगती हैं, 'नूरम'; 
रात भर यह आपका तज़किरा जो करती हैं।

118
तुम्हें नया साल मुबारक, हमें हमारा हाल मुबारक नूरम'; 
तुम्हें नया यार  मुबारक, हमें तुम्हारी याद मुबारक।

119
किसी गीत से लगे है आप नूरम', 
बस हम गुनगुना नहीं सकते।

120
दिल की चोटों ने पूछ लिया, बेवफा तुमने यह क्या किया,
कि न लगा सको दिल तुम किसी और से, 'नूरम'; 
इसलिए हमने तुम्हारा दिल ही तोड़ दिया।

121
मोहब्बत का भी मिज़ाज़, खास होता है 'नूरम' 
आप मरते है जिन पे, उनको हमेशा ऐतराज़ होता है।

122
रूठकर हमसे न गुमसुम हो जाइये 
'नूरम' देखिये ज़रा सा तो मुस्कुराइए। 

123
फक्त एक आवाज़ ही है, फ़ोन में निशानी तुम्हारी
'नूरम' डी.प. पे भी तुमने, अब हमसे मुँह मोड़ लिया है। 

124
इतनी भी ना निहारा करो ख़ुद को “नूरम”,
कि थोड़ा तो हक़, नाचीज़ का भी बनता है।

125
इतना भी ना संवारा करो ख़ुद को “नूरम”,
कि कहीं आइना ही ना शर्मा जाये आपसे।

126
इस कदर भी ना देखा करो, ख़ुद को आइने में “नूरम”,
कभी आइना ही बोल पड़े 'माह-पारा' मुझे जला रही हो क्या? 

127
बेशक तेरी सादगी में भी, हुस्न बेमिसाल है 'नूरम',
इस सबब तेरे शहर में, कुवारों का हाल बेहाल है। 

128
इतना भी ना सादगी में रहा करो,
कुछ तो आराइश-ए-नुमायाँ किया करो।
माह-ए-रमज़ान मुसलसल है 'नूरम',
कुछ तो खुदा का खौफ किया करो। 

129
कौन सी बात नहीं मानी 'जाना',
कौन सा हुक्म तामील नहीं किया।
'नूरम' आपने कहा तंग न किया करें,
हमने सारा ज़माना छोड़ दिया।

130
कौन सी बात नहीं मानी 'नूरम',
कौन सा हुक्म तामील किया नहीं। 
आपने हंस कर कहा, "आप रहने दें" 
और हमने जिन्दा रहा गया नहीं। 

131
बस गये हो, आँखों में नींद बनकर,
किसी बंद लिफाफे की तकदीर बनकर।
मिलते हैं आँसू, उनको ही अक्सर 'नूरम',
जो करते हैं, मोहब्बत मुरीद बनकर।

132
एक कप चाय हो जाये, एक मुलाकात खास।
दो बिस्कुट दो बातें, हाथों में हाथ, 
हसीन शाम और आप का साथ।  
किसी झील किनारे, एक लॉन्ग वाक, 
आपकी महकती जुल्फें, मेरे बहकते जस्बात।
गुलाब की झाड़ी में, आपके दुपट्टे का फसंना, 
आप का शर्मा कर कहना, 'नूरम'! रहने दें आप;    
मेरी छोटी सी हसरत, एक मुलाकात खास।

133
आप से जो प्यार मिला 'नूरम'
न जाने, वह इश्क़ था भी,
या था कोई फलसफा।
जिसे हम लफ़्ज़ों से तराशते हैं, 
किताबों में संभाते हैं,
और अक्सर रिश्तों में तलाशतें हैं।

134
बात करते हो मोहब्बत की, और इतना भी नहीं जानते 'नूरम',
इश्क़ का तीर दिल में गुस्ता तो है, पर बाहर नहीं निकलता;
मोहोबत में आँखों में नमीं और दिल में दर्द तो होता ही है।

135
आपकी यादों का सफर, 
लम्भा भी था और मुश्किल भी।
हम उलझते ही रहे और सुलगते ही, 
'नूरम' उस पर आपकी बेरुखी, 
हम संभालते ही रहे और तड़पते ही।

136
थक गए हैं राहे मोहब्बत पे चलते चलते,
पर मिलने को दिल बेकार भी है।
आपके दर्दे दिल से, हम नहीं बेख़बर, 
'जाना' तीरे इश्क़ इस दिल के पार भी है।
अन्जामें मोहबत का, खुदा को मालूम, 'नूरम' 
यही तो है मोहब्बत और यही मज़ा भी है।

 137
वो राज़ ही क्या, दिल में दफन न हो,
वो दिल ही क्या, जिसमें दिलबर न हो।
मोहोबत खुदा से हो, या माशूक से 'नूरम',
वो महबूब ही क्या, जिसमें आग न हो।

138
उसी तरह निभाई है, होली की रस्म आपने, 
जिस तरह खेला है, दिल से हमारे आपने। 
जब हम आईने में बेरंग, खुद को देखते हैं,
'नूरम' हमें(बस)आपके बदलते रंग ही दिखते हैं।

139
खुशबू और पंखुड़ियां दोनों बिखर जाती हैं, 
'नूरम' यह वक़्त है, कभी एक सा नहीं रहता।
और कईं रंगों में बिकते हैं, गुलाब भी अब तो,
(कि)हर त्योहार पे लोगों का, रंग बदल जाता है।  

140
गुलाल से गाल, गुलाबों से लगते हैं,
और हमें वो ख्वाबों की ताबीर लगते हैं। 
गुलाब के भी अब कईं रंग होते हैं 'नूरम' 
यह पहले गेहरे फिर, हल्के लगते हैं।

141
लचकाते हैं यूँ कमर, हुस्न वाले रील्स में,  
निकल जाती है जान, अब हर सीन में।  
'नूरम' कोई कहे, इनसे संभाला करो ज़रा,  
व्यूअर्स भी रखते हैं दिल, अरमानों भरा।

142
आपके आने का इंतज़ार भी नहीं है,
आपके जाने का मलाल भी नहीं है।
हम तो खुश हैं, इस एकतरफ़ा मोहब्बत में,
'नूरम' पर लगता है आपको करार नहीं है।

इस सादगी पे कौन न मर जाये ए-खुदा 'नूरम', 
हम बात मेहंदी के रंग के करते हैं और वो होली के।

144
यह सरहद पार की मोहोबत भी सिरदर्द है,
'नूरम' ना वीजा मिलता है और ना करार।

145
गोशा-गोशा तेरी सदाएँ, गोशा-ए-दिल में चेहरा तेरा
मासूम थी मोहब्बत मेरी, बस इतनी थी मेरी ख़ता
समझ न सके चालें तेरी, हम इशारों में मशगूल रहे
'नूरम' दौर आख़िरी मोहब्बत का और आप वसूल रहे।

146
इंतज़ार करना मोहब्बत का उनको गवारा नहीं था,
इज़हार करना मोहब्बत में हमारा मिज़ाज नहीं था।

147
कितना चाहते हैं आपको, आपकी जान के सदक़े,
कितने नादान हो ‘नूरम’, आपका अंदाज़ भी हटके।

148
‘नूरम’ बहती हुई नदी ने
बहते हुए आँसुओं से कहा,
मैं बहती हूँ प्यास बुझाने को,
तू बहती है दर्द जताने को।
मैं सूख जाती हूँ राह-ए-मोहब्बत पे,
तू सूख जाती है अंजाम-ए-मोहब्बत पे।
कुर्बान तो हम दोनों ही हैं ज़माने में,
मैं समंदर की पनाह में, तू झूठे फ़साने में।

149
सुना है ये दरिया आपके मुल्क से आता है,
और ये बयार आपके शहर को जाती है।
हम तो पूछते हैं आपकी ख़ैर-ख़बर आब से,
और भेजते हैं दुआएँ, आपको इन हवाओं से।
दरिया की कल-कल आपकी हँसी-सी लगती है, 'नूरम' 
क्या हवाओं की सायं-सायं हमारा हाल बताती है?

150
किसी ने कहा चाँद मुझसे रहा ना गया 'नूरम' 
फिर उसने कहा बेवफा तेरा चेहरा याद आ गया।

151
आते हो ख्वाबों में बहुत सताते हो, 
'नूरम' इतनी  शरारत कहाँ से लाते हो।

152
My heart leaps twice
When I think of you
Should I go to doctor, 
Or come to see you?

153
काश मैं पुकारूँ और तुम मेरे पास हो 'नूरम', 
सीने से लिपटने की वजह न कोई खास हो।

154
दिल था टूट गया, तो क्या, 
एक शक्श था रूठ गया, तो क्या। 
जान निकलेगी मार जायेंगे, तो क्या, 
(लेकिन) फिर भी याद आये 'नूरम', तो क्या।

155
मोहोबत की देखलीज़ पे कदम है यह पहला, इश्क़ का इम्तिहान है हमारा यह पहला। जो हम जीते तो आप हमारे हो जाना 'नूरम', जो हम हारे हम आपके हो जायेंगे 'जाने-जाना'।

156
तो तोड़ दिया है तुमने वो दिल है मेरा, जो गुमा दिया है तुमने वह सुकून था मेरा। हद हो गयी 'नूरम' और यह तो हद हो गयी, जो बाँट दिया है तुमने वह इश्क़ है मेरा।

157
जिनके ज़िक्र से आ जाती थी आँखों में हया, 'नूरम' अब उनके ज़िक्र से आँखें भर आती हैं।

158
लाटा नाही आल्या तरी समुद्र किनाऱ्याशी जोडलेलाच… 'नूरम' तसंच, तुझ्या न बोललेल्या भावना माझ्या हृदयाशी

159
भीगी आँखें बता रही हैं, बहुत याद करते हो, पर हमसे मिलते हो, तो कुछ कहते नहीं हो। ढीला बदन , खुश्क-मिज़ाज दिखा रहा है, की आजकल सुकून से सोते भी नहीं हो। खुद जल रहे हो हिज्र की आग में, 'नूरम' हमसे कहते हो प्यार करते नहीं हो।

160
यूँ कहर बरपाना किस लिए, हम तो बेइख़्तियार हो चुके हैं अब इतना तड़पाना किस लिए, 'नूरम' हम तो आपके हो चुके हैं।

161
देर से आने की वजह कोई और थी,
उनको हमारे दिल का रास्ता मालूम है।
पास आने की वजह कोई और थी 'नूरम'
हमें उनके दिल का मिज़ाज मालूम है।

162
शेर कहूँ ‘मीर’ का, या ‘ग़ालिब’ का कलाम कहूँ,
‘नूरम’ की नज़्म पढ़ूँ, कैसे दिल का हाल कहूँ।
किसी ज़ुल्फ़ सा उलझ गया हूँ आपके हुस्न में,
रुख़सार के करीब हूँ, लेकिन  दीदार से दूर हूँ।




 //\\****   ॥ नूरम मिश्री ॥  ****//\\  
नयन की सुंदरता नहीं, पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को भावे, वही सच्चा प्यार॥

नयन की सुंदरता नहीं, पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को ध्यावे, वही पाये सार॥

नयन की सुंदरता नहीं पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को पुकारे, उसका बेडा पार॥

नयन की सुंदरता नहीं पलकों का विस्तार।
जो मौन में प्रभु को निहारे, वही प्रीत अपार॥

५  
तेरे वचन पे चलते हैं हम, तेरी भेड़ बन कर।
भीड़ से अलग है हम, 'नूरम' विश्वास के पथ पर॥

६  
सुंदर दिखना आसान है, विश्वासी होना मुश्किल। 
प्रभु प्रेम जटिल है 'नूरम', पर दूर नहीं है मंज़िल॥ 

७ 
प्रभु तेरा मार्ग कठिन है, पर हमें नहीं है जल्दी।
पौड़ी पौड़ी चढ़ते जाएं, 'नूरम' आगे तेरी मर्ज़ी॥

जितना भी तू दे मुझको, मेरी रहती जेबें खाली।
मुझको अपने धाम में रखले, बन के रहूं में दासी॥   

१०
आर पार देखूं अब, दिखे सूरत तेरे निराली।
जब भेद रहा न कोई, दुनिया कहें दिवानी॥

११
आँखों में प्यास हो, माथे पे सजती राख हो,
जन्मों का विश्वास हो, अक्षर-अक्षर हो पंखुडी; 
कंठ में सुर सलोना, मन में जिसके धुन पक्की। 
रूह में उसके रब रहता, हर-दम रहता रमी॥

१२
वो राज़ ही क्या, दिल में दफन न हो,
वो मसीहा ही क्या, ताज काँटों का न हो।
मोहोबत खुदा से हो, या महबूब से 'नूरम',
वो मसीह ही क्या, जिसमें आग न हो।

१३
कविता : लेंट✝ 
येशु में विश्वास हो, माथे पे सजती राख हो।
आँखों में प्यास हो, वचन से हो वाणी सनी॥ 
बोलो जय जय मसीह.. ॥
क्षमाशील सवभाव हो, नियमित बाइबिल अभ्यास हो।
आज्ञाओं का पालन करता, हर-दम रहता रमी॥ 
बोलो जय जय मसीह.. ॥
कंठ में सुर सलोना हो, मन में धुन पक्की हो। 
रूह में तब 'नूरम' रहता, कहलाता विश्वासी धनी॥
बोलो जय जय मसीह.. ॥

 

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